झांसी। बरुआसागर किले को हैरीटेज होटल के रूप में तब्दील किया जाएगा। किले के सामने पड़ी जमीन पर हैलीपैड भी बनाया जाएगा, ताकि यहां वीआईपी व वीवीआईपी स्तर की कांफ्रेंस हो सके और पर्यटक ज्यादा से ज्यादा आ सकें। बीते 30 जुलाई को झांसी आए पुरातत्व निदेशक ने भ्रमण कर क्षेत्रीय पुरातत्व कार्यालय को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर देने क ो कहा है।
झांसी के कई मराठा राजाओं क ा ग्रीष्म काल में प्रवास स्थल रहा बरुआसागर किला प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है। झांसी - खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप कभी सागर की तरह फै ली रहने वाली झील के तट पर मौजूद इस किले के सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया पिछले काफी समय से शासन द्वारा चलाई जा रही है। ताकि यहां अधिक से अधिक संख्या में पर्यटक आ सकें।
इसी क्रम में 30 जुलाई को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में राज्यपाल के दौरे के साथ झांसी आए राज्य पुरातत्व निदेशक ने बरुआसागर किले का भ्रमण किया और किले को हैरीटेज होटल के रूप में विकसित करने पर सहमति दी, जिससे किले में वीआईपी एवं वीवीआईपी कांफ्रेंस की जा सके और पर्यटक अधिक से अधिक संख्या में आकर यहां रुक सकें। इसके लिए उन्होंने क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग से शीघ्र प्रस्ताव देने को कहा है, जो मंजूरी के लिए शासन को भेजा जा सके। इस संदर्भ में क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने बताया कि प्रस्ताव तैयार करने के लिए आईआईटी रुड़की के तकनीकी विशेषज्ञों के अलावा अन्य सरकारी एजेंसियों से सुझाव लिया जा रहा है। जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया जाएगा।
16 वीं शताब्दी में बना था यह किला
सन 1689 - 1736 तक बुंदेला राजा उदित सिंह ने किले का निर्माण कराया था। छोटी पहाड़ी पर मौजूद यह किला 2.5 वर्ग में किमी क्षेत्र में फैला है। किले के चारों ओर विशाल परकोटे में नौ बुर्ज हैं और मध्य में 30 मीटर ऊंचा राजमहल है, जिसे पंचमहल कहते हैं।
कई बार हो चुका है सौंदर्यीकरण
किले में सौंदर्यीकरण का कार्य पिछले काफी समय से जारी है। राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किले में 12 वे वित्त आयोग से 50 लाख रुपये में बाउंड्री वॉल, उद्यानीकरण, पर्यटन विभाग द्वारा डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय, लाइट, पर्यटकों को बैठने के लिए बैंच आदि कार्य किए गए थे। राज्य पुरातत्व विभाग ने 21 लाख रुपये में संरक्षण के अलावा बोरिंग कराई थी।