झांसी। राजकीय संग्रहालय में शनिवार को इतिहासविद् डा. भगवान दास गुप्त स्मृति शोध संस्थान के तत्वावधान दो दिवसीय 18 वीं राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ, जिसमें इतिहासकारों ने एक स्वर में कहा कि भारत में सदैव दार्शनिकों एवं यात्रियों का सम्मान रहा है। विदेशी यात्री भी यहां के विशेषता के कायल थे।
‘भारत की यात्रा वृतांत एवं इतिहास लेखन’ विषय पर आधारित संगोष्ठी में उत्तराखंड के डा. संजय कुमार ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध यात्री फहयान, इब्नबतूता, ह्वेनसांग ने भारत के भ्रमण दौरान न सिर्फ गहन अध्ययन किया, बल्कि अपने लेखन में भारत की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक विशेषता को भी उभारा। ह्वेनसांग की यात्रा ने यहां कौड़ियों का मुद्रा के रूप में महत्व बताया था। हालांकि राजनीतिक स्थितियां कुछ जटिल बताई थीं। उन्होंने कहा कि भारत ने सदैव दार्शनिकों का सम्मान किया है। उनके अनुसार स्कीलाक्स भारत का प्रथम विदेशी यात्री था।
कृष्ण गोपाल व्यास ने कहा कि नदी की उपजाऊ मिट्टी से खेत समृद्ध हो जाते हैं। चंदेलों व बुंदेलों ने तालाब व बावड़ी बनवाकर जनहित का भारी काम किया। बरुआसागर आज भी इसलिए समृद्ध है। संगोष्ठी में 12 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें वीके श्रीवास्तव, प्रभाकर गर्दे, मधुबाला कुलश्रेष्ठ, नीलिमा, नेहा राजपूत, नवीन गिडियन, पंकज सिंह, ज्योति जोशी, रंजना जैन, रुबीना परवीन, नफासत उल्ला खां के शोध प्रमुख रहे। शोध पत्रों में रूसी यात्री लिवदिव की भारत यात्रा, इब्नबतूता की चंबल क्षेत्र एवं बुंदेलखंड की यात्रा खास रही।
इससे पूर्व संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि समाज व सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वह जल संसाधन के संरक्षण को प्राथमिकता दे। इस मौके पर चित्रकार राकेश वर्मा का अभिनदंन किया गया। वहीं बुंदेलखंड के अभिलेख तथा पन्ना राज्य पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे, मोहन जी गुप्त, आरसी गुप्ता, चंद्ररेखा सिंह, कृष्णा गुप्ता, आशीष गुप्ता, अनिल उपाध्याय, कामिनी बघेल, सुनील तिवारी, राजेंद्र रेजा, हरगोविंद कुशवाहा, इकबाल हुसैन, मीरा अग्रवाल, राधा रमण शांडिल्य, राम प्रकाश अग्रवाल, मोहन नेपाली आदि मौजूद रहे। अंत में आभार संस्थान की अध्यक्षा डा. सुधा गुप्ता ने जताया।