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Jhansi News: बुंदेलखंड में बेहतर खेती के लिए विदेशी वैज्ञानिक करेंगे अरहर, मूंगफली पर शोध

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झांसी। बुंदेलखंड के किसान कम बारिश और पानी की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में बुधवार को कृषि अनुसंधान को नई दिशा देने के लिए अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) और अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह (सीजीआईएआर) के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय का दौरा किया।
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इस दौरान बैठक में कम पानी और प्रतिकूल मौसम में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों पर शोध बढ़ाने पर जोर दिया गया। मूंगफली, मोटे अनाज और अरहर को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते तलाशे गए। कुलपति अशोक कुमार सिंह ने बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान आईसीआरआईएसएटी के अनुसंधान एवं नवाचार उप महानिदेशक स्टैनफोर्ड ब्लेड और सीजीआईएआर की मुख्य वैज्ञानिक सैंड्रा क्रिस्टीना कोथे मिलाच ने बुंदेलखंड में पानी की उपलब्धता और अनिश्चित मौसम खेती की मुख्य चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने पर वैज्ञानिकों ने विचार साझा किए। फसल प्रजनन और उन्नत आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग पर भी चर्चा हुई। कुलपति डॉ. अशोक कुमार के सुझाव पर अरहर की उन्नत किस्मों के विकास के लिए संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम पर सहमति बनी। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप किस्मों के विकास के विकल्प तलाशे जाएंगे। इससे बुंदेलखंड में अरहर की खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।


मूंगफली और किसान-केंद्रित अनुसंधान
स्टैनफोर्ड ब्लेड ने बुंदेलखंड में मूंगफली और मोटे अनाज पर शोध की व्यापक संभावनाएं बताईं। उन्होंने नई किस्मों के विकास के लिए उपयोगी आनुवंशिक संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। सैंड्रा क्रिस्टीना कोथे मिलाच ने किसान-केंद्रित अनुसंधान पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को किसानों के साथ मिलकर काम करना होगा। तभी शोध का वास्तविक लाभ खेतों तक पहुंच पाएगा।
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टिकाऊ कृषि व्यवस्था का विकास

किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। इससे किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। स्टैनफोर्ड ब्लेड ने आगामी वर्ष आईसीआरआईएसएटी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय के साथ सहयोग की इच्छा जताई। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली इकाई, मधुमक्खी पालन इकाई और उच्च तकनीकी नर्सरी भी देखी। निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय में संचालित शोध कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश्वर सिंह और सब्जी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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