झांसी। किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए मंडी के चक्कर नहीं लगाने होंगे और न ही औने पौने दामों में समझौता करना होगा। उपज की गुणवत्ता के अनुसार उन्हें पूरा दाम मिलेगा और वो भी तत्काल। जी हां, उद्योग विभाग की कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम के तहत यहां फूड प्रोसेसिंग का हब बनाया जा रहा है। इसकी तैयारियां अंतिम दौर में हैं। फूड प्रोसेसिंग की बीस कंपनियों ने यहां अपनी इकाई स्थापित करने में सहमति भी जता दी है।
बुंदेलखंड में अदरक, हल्दी, दलहन व तिलहन की बड़े पैमाने पर पैदावार होती है। बावजूद, इन्हें उगाने वाले किसानों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह से सही समय पर उपज का सही मूल्य न मिल पाना है। लेकिन, अब इस कमी को उद्योग विभाग अपनी कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम के तहत पूरा करने जा रहा है।
योजना के तहत सत्तर एकड़ जमीन पर फूड प्रोसेसिंग की चालीस इकाइयां स्थापित की जाएंगी। ये इकाइयां पीपीपी मॉडल पर लगेंगी। सरकार की ओर से इन इकाइयों को सुविधाओं के साथ-साथ अस्सी फीसदी तक अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। यहां लगने वाली इकाइयां किसानों को तत्काल भुगतान देकर उनसे सीधे माल खरीदेंगी तथा उपज की प्रोसेसिंग कर बेचेंगी। इस काम में किसानों और उद्यमियों के बीच सीधी खरीद-फरोख्त होगी। किसी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके लिए ललितपुर रोड पर सत्तर एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है, जिसे लेने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है।
हल्दी, अदरक, दलहन व तिलहन उगाने वालों को होगा फायदा
फूड प्रोसेसिंग हब में लगने वाली इकाइयों का सबसे अधिक फायदा हल्दी, अदरक, तिलहन व दलहन का उत्पादन करने वाले किसानों को होगा। प्रोसेसिंग करने वाली कंपनियां इनको हाथोंहाथ खरीदेंगी। उनको बाहर जाकर अपना माल नहीं भेजना होगा। विभिन्न उत्पाद यहीं तैयार किए जाएंगे।
पचास करोड़ का होगा निवेश
फूड प्रोसेसिंग की चालीस से अधिक इकाइयां यहां स्थापित होंगी। इसमें पचास करोड़ से अधिक के निवेश की संभावना जताई जा रही है। यहां फूड प्रोसेसिंग का हब बनने से केवल झांसी - ललितपुर ही नहीं बल्कि बुंदेलखंड के सभी जनपदों के किसान लाभान्वित होंगे।
दो हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में झांसी के आगे बढ़ने पर केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि बेरोजगारों को भी खासा लाभ होगा। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार फूड प्रोसेसिंग में लगभग दो हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से भी तमाम रोजगार सृजित होंगे।
मुंबई तक जाता है बरुआसागर का अदरक
बरुआसागर के अदरक की पूरे देश में अलग पहचान है। यहां से अदरक मुंबई तक जाता है। किसानों को इसके औनेपौने दाम दे दिए जाते हैं और वो भी समय पर नहीं मिल पाते हैं। बिचौलिए कम दामों में यहां से अदरक लेकर ज्यादा दामों पर बाहर बेचते हैं। अक्सर किसानों का पैसा भी लटका दिया जाता है।
फूड प्रोसेसिंग की इकाई लगाने के लिए बीस कंपनियों ने सहमति जता दी है। ये सभी कंपनियां बाहरी है और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र की दिग्गज हैं। यह योजना उद्योग विभाग की भी प्राथमिकता में है। इस साल फूड प्रोसेसिंग का ये हब आकार लेने लगेगा।
- सुधीर कुमार श्रीवास्तव, उपायुक्त - उद्योग विभाग