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Jhansi News: पीपीपी मॉडल पर संरक्षित होंगे जनपद के पांच प्राचीन मंदिर

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संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग ने पांच प्राचीन मंदिरों को संरक्षित करने की सूची शासन को भेजी थी। उस पर प्रदेश मुख्यालय से मुहर लग गई है। अब रामपुरा, सिंगार, सुट्टा, स्यावरी और ठर्राें में स्थित मंदिर को पीपीपी मॉडल पर संरक्षित किया जाएगा।



जनपद में कई ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर हैं, जिनका संरक्षण अभी पुरातत्व विभाग करता है। कई ऐसे मंदिर हैं, जो जिला मुख्यालय से काफी दूर हैं। इन्हें संरक्षित रखने में समस्या आ रही थी। इसे देखते हुए प्रदेश मुख्यालय ने सभी जिलों से प्राचीन मंदिरों की सूची मांगी थी, जो जिला मुख्यालय से दूर हैं। क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई ने पांच मंदिरों की सूची मुख्यालय भेजी थी। इन सभी मंदिरों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने पर मुहर लगा दी गई है। इनमें राम-जानकी मंदिर जो ग्राम रामपुरा में है। यह मंदिर झांसी-चिरगांव-गुरसराय राजमार्ग पर चिरगांव से लगभग 20 किमी की दूरी पर है। वहीं, राम-जानकी मंदिर ग्राम सिंगार में है। इस मंदिर तक झांसी-गुरसराय-बामौर मार्ग से होते हुए पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर झांसी से लगभग 80 किमी की दूरी पर है। ग्राम सुट्टा में राम-जानकी मंदिर है। इस मंदिर तक झांसी-बामौर से हाेते हुए पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर लगभग 77 किमी की दूरी पर है।
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चौथा ग्राम स्यावरी का बंजारों का मंदिर है। इस मंदिर तक मऊरानीपुर-गुरसराय मार्ग होते हुए पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर तहसील मुख्यालय मऊरानीपुर से लगभग 12 किमी तथा जनपद मुख्यालय से 77 किमी की दूरी पर है। पांचवां मंदिर ग्राम ठर्रों का पठामढ़ी मंदिर है। इस मंदिर तक झांसी-ककरबई होते हुए देेवरी से ठर्राें तक पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर तहसील मुख्यालय गरौठा से लगभग 25 किमी तथा जनपद मुख्यालय से 120 किमी की दूरी पर है।



अब ढंग से हो सकेगी देखभाल

पुरातत्व विभाग के अधीन यह मंदिर भले ही आता हो पर मुख्यालय से दूर होने के कारण इनकी देखरेख नहीं हो पा रही थी। इन मंदिरों की वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण इसे राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित करने के लिए पीपीपी मॉडल के तहत लिया गया है।



इन प्राचीन मंदिरों को अब तक किया गया संरक्षित



जनपद के कई प्राचीन मंदिर हैं जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनमें से कुछ मंदिर संरक्षित हैं। इनकी देखभाल पुरातत्व विभाग या स्थानीय प्रशासन की ओर से की जाती है। इनमें महालक्ष्मी मंदिर, गणेश मंदिर, जराय का मठ शामिल है।
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वर्जन



मुख्यालय से जनपद के प्राचीन मंदिरों को पीपीपी मॉडल पर संरक्षित करने के लिए पिछले साल सूची मांगी गई थी। सूची में पांच मंदिरों को शामिल किया गया था। इन मंदिरों पर मुहर लग गई है। - मनोज यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी
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