झांसी महानगर से जैन समाज में पहली महिला संत बनेगी सुशीला जैन। हालांकि इनसे पहले बबीना, ललितपुर, टीकमगढ़, सागर, सतना, पन्ना सहित बुंदेलख्ंाड के कई क्षेत्रों से महिलाओं ने आर्यिका की दीक्षा ली और साधना कर रही है। गृहस्थ जीवन त्याग कर भिंड में महिला संत की जैनेश्वरी दीक्षा लेने जा रही महानगर की सुशीला जैन और देवेंद्र नगर पन्ना की राजुल दीदी, प्रीति दीदी, रोशनी दीदी, शिखा दीदी, प्रियंका दीदी की गोद भराई करगुवां जी जैन मंदिर में हुई। बृहस्पतिवार को जैन समाज के अनुयायियों ने भक्ति भाव के साथ गोद भराई में मखाने व सूखे मेवा रखे।
मंदिर के आचार्य विद्यासागर सभागार में हुए कार्यक्रम में जैनेश्वरी दीक्षा ले रही सुशीला जैन ने अपने संदेश मेें कहा कि हमें मोक्ष मार्ग दिखाई पड़ गया है। हम उस पर जा रहे है। आप सभी भी इसी मार्ग से अपने आत्म कल्याण को आना। मुनि श्री प्रेक्षासागर ने कहा कि संसार में मानव जीवन प्राप्त करना दुर्लभ है। इस जीवन का यह बहनें कल्याण करेगी। पंचायत अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन ने कहा कि सुशीला देवी के महिला संत बनना झांसी के लिए गौरव की बात है। इस अवसर पर पंचायत महामंत्री प्रवीण कुमार जैन, डा. हीरालाल जैन, ब्रह्मचारी स्वतंत्र जैन, सुभाष जैन, संजय जैन, अमित प्रधान, शिखर चंद्र जैन, राजेंद्र जैन, अंजना जैन, देवी जैन, सुशीला जैन, ममता जैन, राखी जैन, पुष्पा जैन, चक्रेश जैन, वरुण जैन आदि मौजूद रहे।
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मृत्यु से 48 मिनट पहले भी ले सकते है दीक्षा
जैन धर्म में संत दीक्षा आठ वर्ष की आयु के बाद और मृत्यु से 48 मिनट पहले भी ली जा सकती है। यह दीक्षा शुभ मुहूर्त में दी जाती है। दीक्षा लेने से पहले व्यक्ति का स्वभाव, रुचि, सात्विक जीवन को जैन मुनि दो से चार वर्षों तक परखते हैं।
परिवार के सभी लोग खुश है: सुशीला
30 सितंबर को भिंड में संत की दीक्षा ले रही महानगर की सुशीला जैन के मुताबिक वैराग्य लेने का उद्देश्य उनका बहुत समय से था। घर, गृहस्थी का दायित्व पूरा कर वह मोक्ष मार्ग प्राप्त कर रही है। परिवार के सभी लोग खुश है। वह आर्यिका श्री विभा श्री माता जी के प्रवचन से प्रभावित हुई और दो वर्षों से माता जी के साथ साधना कर रही है।
भावुक हुआ पूरा परिवार
गोद भराई और बिलौनी की रस्म दौरान सुशीला जैन का पूरा परिवार भावुक हो उठा। पुत्र बाहुबलि जैन, पुत्रियों में रश्मि जैन, नेहा जैन व बहू रचना जैन ने एक स्वर में कहा कि सभी खुश है। वैराग्य ईश्वर की इच्छा से होती है और वह किसी भी पल हो सकता है। बाहुबलि जैन ने अमर उजाला को बताया कि मां परिवार से जा रही है, बेटा होने पर बुरा तो लग रहा है, लेकिन उनका दृढ़ संकल्प और आत्म कल्याण के भाव ने इसे पीछे कर दिया है। पहले वह हमारी माता जी थी, अब जगत की माता कहलाएगी। उल्लेखनीय है कि करगुवां जी क्षेत्र के निवासी है अशोक जैन की पत्नी है सुशीला जैन।
जैन धर्म की पहली आर्यिका है ब्राह्मी और सुंदरी
ब्राह्मी और सुंदरी जैन धर्म की पहली महिला संत मानी जाती हैं, जो तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव की पुत्रियां है। जैन समाज में महिला संत को आर्यिका कहते है। मान्यता है कि आर्यिका ब्राह्मी ने ब्राह्मी लिपि का ईजाद किया था, जिसमें रचित कई जैन धर्म ग्रंथ है। वहीं भगवान ऋषभ देव का वर्णन वेदों में कई जगह है।
सिर्फ एक बार पानी और भोजन लेना होगा
दिगंबर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष प्रवीण जैन के मुताबिक संत दीक्षा के बाद आर्यिका को 24 घंटे में सिर्फ एक बार भोजन, पानी लेना होता है। सिर्फ दो सफेद साड़ी जिसे अखंड वस्त्र माना जाता है, इस्तेमाल कर सकेगी। इसके अलावा उन्हें पूरा जीवन पद विहार करना होगा। दिन में तीन बार सुबह 5 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम सात बजे सामायिक ध्यान, शाम छह बजे प्रतिदिन अनजाने में की गई गलतियों की ईश्वर क्षमा याचना करनी होगी। एक पिच्छी और एक कमंडल पूरे जीवन इनके साथ रहेगा।
सभी है उच्च शिक्षित
महानगर की सुशीला जैन के अलावा देवेंद्र नगर पन्ना की पांच अन्य बहनें भी जैनेश्वरी की दीक्षा ले रही है। खास बात यह है कि सभी उच्च शिक्षित और समृद्ध घरों से है। इनमें 33 वर्ष की राजुल दीदी एमए, बीएड, पीजीडीसी, बीसीए, 22 वर्ष की प्रियंका दीदी बीएससी, 29 वर्ष की शिखा दीदी एमए आईआईटी, नेहा दीदी एमए तो सुशीला दीदी बीए किए हुए है। इन सभी का कहना है कि परिवार वालों ने रोका था, लेकिन हमेशा भाव थे कि आत्म कल्याण पाना है। इसके साथ ही बचपन से उन्हें गुरुओं का सत्संग मिला, जिसका असर पूरा जीवन भर रहा। ऐसे में वह मोक्ष मार्ग पर चल दी है। उल्लेखनीय है कि राजुल दीदी और प्रीति दीदी, रोशनी व नेहा सगी बहने हैं।