प्रतिबंधित एक बार उपयोग वाली (सिंगल यूज) प्लास्टिक की मदद से झांसी में पहली सड़क बनाई गई है। यह सड़क पीडब्ल्यूडी ने झांसी-उनाव बालाजी मार्ग में भरारी संपर्क मार्ग पर बनाई है। इसमें कोलतार की जगह इस प्लास्टिक का इस्तेमाल हुआ है।
इस सड़क को बनाने में कुल 6.99 लाख रुपये की लागत आई है। कुछ दिन पहले इसे अंतिम रूप देकर आम लोगों के इस्तेमाल के लिए खोल दिया गया। अभियंताओं के मुताबिक प्रयोग सफल होने पर दूसरी सड़कें भी इसी माध्यम से बनवाई जाएंगी।
प्लास्टिक के बेतहाशा इस्तेमाल से अब इसके निस्तारण की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक का कोई दूसरा इस्तेमाल न होने से जगह-जगह इसके ढ़ेर पैदा हो रहे हैं। इस परेशानी से निपटने को प्रदेश सरकार ने पीडब्ल्यूडी को सड़क निर्माण में कोलतार की जगह इसके इस्तेमाल के निर्देश दिए।
इसके बाद पीडब्ल्यूडी अभियंताओं ने कवायद शुरू की। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर झांसी-उनाव बालाजी मार्ग पर करीब सात किलोमीटर आगे स्थित लगभग 1.10 किलोमीटर लंबे भरारी संपर्क मार्ग को चुना गया। इसके निर्माण में कोलतार की जगह सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया।
अभियंता लाखन सिंह पाल के मुताबिक सड़क निर्माण में इस्तेमाल से पहले सिंगल यूज प्लास्टिक को क्रशर मशीन के जरिए बारीक कुतरा जाता है। इसके बाद उच्च दबाव की मशीनों के माध्यम से इसे कंप्रेस किया जाता है।
इसके बाद यह कोलतार की तरह इस्तेमाल में लाई जाती है। गिट्टी बिछाने के बाद कोलतार की जगह करीब 20 एमएम मोटाई की ऊपरी सतह पर इसे बिछाया गया है हालांकि इसके इस्तेमाल से लागत में बहुत अधिक अंतर नहीं आया है।
अभियंताओं का कहना है कोलतार एवं सिंगल यूज प्लास्टिक को इस्तेमाल लायक बनाने में लागत तकरीबन एक ही आती है। अवर अभियंता लाखन सिंह के मुताबिक निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सड़क इस्तेमाल के लिए खोल दी गई है।
कोलतार के मुकाबले सिंगल यूज प्लास्टिक टिकाऊ
पीडब्ल्यूडी अभियंताओं का कहना है कोलतार के मुकाबले सिंगल यूज प्लास्टिक को टिकाऊ समझा जाता है लेकिन अब इसका परीक्षण किया जा रहा। अभियंताओं का कहना है कंप्रेस होने के बाद प्लास्टिक का व्यवहार कोलतार की तरह होता है लेकिन उसकी यह क्षमता कितने दिनों तक बनी रहती है यह अभी साफ नहीं है। अगर यह क्षमता कोलतार की तरह रही तब यह सफल हो सकती है। वहीं, पानी का प्रभाव न पड़ने की वजह से भी यह सफल साबित हो सकती है।
इस सड़क को भी बनाए जाने का प्रस्ताव
बचावली-मड़ौरा के बीच करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी सिंगल यूज प्लास्टिक के माध्यम से ही कराने की योजना बनाई गई है।