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करगुवां जी में बनेगा पहला विराग स्तंभ

Tue, 23 May 2017 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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यति सम्मेलन - फोटो : amar ujala
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आचार्य विराग सागर के आचार्य पदारोहण समारोह के उपलक्ष्य में देश में 25 विराग स्तंभ बनाए जाएंगे। पहला स्तंभ झांसी के सांवलिया पाश्वनार्थ तीर्थ क्षेत्र करगुवां जी में बनेगा। करगुवां जी जैन मंदिर में चल रहे युग-प्रतिक्रमण यति सम्मेलन महामहोत्सव में सोमवार को हुई राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी में यह निर्णय लिया गया।
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महा महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने झांसी में पहला स्तंभ बनाए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि विराग स्तंभ के निर्माण में जो लोग भी सहयोग करेंगे, उनके नाम शिलापट पर स्वर्णाक्षरों से अंकित कराए जाएंगे। इस मौके पर गणाचार्य विराग सागर ने कहा कि सत्य, धर्म और अहिंसा का पालन प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिए। गणाचार्य के वरिष्ठ शिष्य आचार्य विनिश्चय सागर ने गुरु महिमा पर कहा कि शिष्य यदि गुरु के वचनों के अनुसार कुएं में भी कूद जाए तो वहां से भी रत्न लेकर लौटेगा। गुरु और शिष्य का संबंध विश्वास का होता है। मुनि प्रेक्षासागर ने कहा कि दिव्यता में ही भव्यता है। हम गुरु में ही परम पिता परमात्मा के दर्शन कर अपने को धन्य मानें। हस्तिनापुर के पीठाधीश्वर स्वामी रविंद्र कीर्ति ने कहा कि जैन समाज में आज संगठन एवं एकता की आवश्यकता है। जैन समाज दिगंबर और श्वेतांबर में बंट गया है। आचार्य के ससंघ की प्रशंसा कर उन्होंने कहा कि यह वह संघ है, जो कि मुनि परंपरा को जीवंत किए है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वह संतों के अंदर ग्रंथ न देखें, उनके पिच्छी कमंडल देखें। समाज एक सूत्र में बंधे और एक क्रिया में चले।
संगोष्ठी में स्वामी रविंद्र कीर्ति ने ज्ञानमती माताजी द्वारा लिखित नवीन साहित्य एवं मूलबद्री दक्षिण भारत के स्वामी चारूकीर्ति भट्टारत ने आचार्य श्री को ताड़पत्र पर स्वर्ण से अंकित णमोकार मंत्र की प्रति भेंट की। संगोष्ठी के अन्य वक्ताओं में प्रेमचंद सुमन, डॉ. नरेंद्र कुमार, प्रतिष्ठाचार्य पवन दीवान, डॉ. हरीशचंद्र मुरैना, डॉ. अनिल ब्रह्मचारी, डॉ. सनत कुमार, डॉ. महेंद्र कुमार, सूरज मल, अजीत जैन बंधु शास्त्री आदि विद्वानों ने भी आचार्य श्री द्वारा लिखित ग्रंथ रत्नत्रयवर्धिनी पर अपने व्याख्यान दिए और साधु व श्रावक दोनों के लिए उपयोगी ग्रंथ बताया। यति सम्मेलन में रात को संगीतमय भजन हुआ, जिसमें मुंबई के रविंद्र जैन फाउंडेशन के कलाकारों ने भजनों को प्रस्तुत किया।
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स्तंभ में जैन धर्म के ग्रंथ और उपदेश अंकित होंगे
आने वाली पीढ़ियों को युग प्रतिक्रमण-यति सम्मेलन और आगम ग्रंथों के उपदेशों की जानकारी देने के लिए विराग स्तंभ बनाए जाएंगे। स्तंभ पंच धातुओं व सीमेंट-कंक्रीट से तैयार किया जाएगा। 21 फीट ऊंचाई वाले स्तंभ में जैन धर्म के मुख्य उपदेशों को अंकित किया जाएगा। महा महोत्सव समिति के अध्यक्ष प्रदीप जैन आदित्य के अनुसार यति सम्मेलन के बाछ स्तंभ का निर्माण कराया जाएगा। जल्द ही इसकी तिथि भी घोषित की जाएगी।
 
संगोष्ठी में कांग्रेस की चर्चा
संगोष्ठी में क ांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और कांग्रेस भी चर्चा में रही। कई विद्वानों ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की सोच जैन समाज और खासकर जैन साधुओं की प्रति अगाध श्रद्धा की है। कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व समय-समय पर जैन साधुओं से आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेता रहता है। वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार में जैन समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया था।

मालचंद्र को पुण्य पुरोधा की उपाधि
जयपुर के मालचंद्र जी रावका को प्रथम यति सम्मेलन के पुण्य पुरोधा की उपाधि से नवाजा गया। महोत्सव समिति की ओर से प्रदीप जैन आदित्य, राजीव जैन सिर्स, अशोक जैन, प्रवीण कुमार जैन ने उनका अभिनंदन किया।

यति सम्मेलन में आज
सुबह 6:15 बजे: अभिषेक महाशांति धारा नित्यार्चन
सुबह 7 बजे: राष्ट्रीय रजत आचार्य पदारोहण पर पूज्य श्री का विशेष पूजन एवं प्रवचन
दोपहर 1 बजे: महिला सम्मेलन
दोपहर 2 बजे: उत्तरांचल दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी का सम्मेलन
शाम 7 बजे: भक्तिमय आरती
रात 8 बजे: शास्त्र सभा एवं विद्वत सम्मान
रात 8:30 बजे: राजेंद्र जी उमरगा एंड पार्टी द्वारा नाटकीय कार्यक्रम

यह रहे मौजूद
बीआईईटी के निदेशक बीके त्यागी, डॉ. मनोज गुप्ता, चंद्रशेखर तिवारी, महंत विष्णु दत्त स्वामी, पुरुषोत्तम स्वामी, राम नरेश त्रिवेदी, चंपालाल, प्रियंका जैन, राजेश जैन, दिगंबर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष प्रकाश चंद जैन, मनीष जैन, अशोक कुमार बड़जात्या, प्रदीप कुमार, प्रसन्न कुमार, सुभाष जैन, श्रेयांस जैन बडौत, अर्चना गुप्ता, संजीव त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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