निगम की ओर से आउटसोर्सिंग का ठेका देने के लिए निविदा निकाली गई थी। बीते जनवरी में चयन होने पर लखनऊ की फर्म को ठेका मिल गया था। एक फरवरी से ही फर्म ने कामकाज संभाला है। अब शिकायत होने से फर्म की परेशानी बढ़ गई है।
नगर निगम में आउटसोर्सिंग का टेंडर लेने वाली फर्म जांच के घेरे में आ गई है। फर्म की ओर से लगाए कुछ दस्तावेज के कूटरचित होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत मिलने पर नगर आयुक्त के निर्देश पर दस्तावेज के सत्यापन के लिए लखनऊ नगर निगम को चिट्ठी भी लिख दी गई है। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद पूरी स्थिति साफ हो जाएगी।
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जालौन के अमखेड़ा के रहने वाले सागर ने नगर आयुक्त से शिकायत की है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की निविदा में सफल घोषित होने वाली जिस फर्म को सफाई कार्य का ठेका दिया गया है, उसने लखनऊ नगर निगम के तीन कार्यादेश लगाए हैं। एक आदेश 28 मार्च 2022, दूसरा 29 मार्च 2023 और तीसरा 30 मार्च 2024 का है। इन तीनों कार्यादेश के संबंध में बीते सात फरवरी को आईजीआरएस के जरिये लखनऊ नगर निगम से सत्यापन कराया गया मगर संबंधित अधिकारी ने इन कार्यादेशों की पुष्टि नहीं की है। कहा कि लखनऊ के अधिकारी ने आख्या में लिखा है कि कार्यादेश पूर्व में तैनात रहे नगर स्वास्थ्य अधिकारियों के कार्यकाल के हैं। हस्ताक्षर के आधार पर पत्रों का सत्यापन करना संभव नहीं है लेकिन पूर्व के वर्षों के डिस्पैच रजिस्टर में संबंधित प्रमाणपत्र की संख्या का कोई उल्लेख नहीं है। इसी का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ये कार्यादेश संदिग्ध अथवा कूटरचित हैं, जिनकी जांच कराई जाए। अनियमितता मिलने पर फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इसी महीने से फर्म ने संभाला कामकाज
नगर निगम की ओर से आउटसोर्सिंग का ठेका देने के लिए निविदा निकाली गई थी। बीते जनवरी में चयन होने पर लखनऊ की फर्म को ठेका मिल गया था। एक फरवरी से ही फर्म ने कामकाज संभाला है। अब शिकायत होने से फर्म की परेशानी बढ़ गई है।
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आउटसोर्सिंग का टेंडर लेने वाली फर्म की ओर से लगाए गए दस्तावेज के संबंध में शिकायत आई है। दस्तावेज के सत्यापन के लिए लखनऊ नगर निगम को पत्र लिखा गया है। वहां से जवाब आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। - आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त