झांसी। दीपावली के पर्व पर आतिशबाजी के दौरान लगातार हादसे होते रहे। पटाखे, बम छुड़ाने के दौरान कई बच्चों ने उंगलियां गंवा दीं। सैकड़ों के चेहरे बिगड़ गए। कइयों की आंख की रोशनी तक चली गई। इन हादसों से भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं और लगातार रोशनी के त्योहार पर बम, पटाखे छुड़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो दीपावली पर आग या बारूद से जलने के मामलों में दोगुना तक इजाफा हो जाता है। दिवाली शुरू होने के चार-पांच दिन पहले से लेकर 10-15 दिन बाद तक प्लास्टिक सर्जन, आई सर्जन के पास काफी संख्या में केस आते रहते हैं। कई बार स्थिति कम बिगड़ी होने पर डॉक्टरों द्वारा नियंत्रित कर ली जाती है। जबकि कभी-कभी बारूद या आग व्यक्ति को इतना नुकसान पहुंचा देती है कि अंग काटने तक की नौबत आ जाती है।
इन मामलों से लें सबक
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केस-1
कोतवाली थानाक्षेत्र अंतर्गत रहन वाला एक बच्चा सात-आठ साल पहले दीपावली पर अनार जलाते समय हाथ बुरी तरह जल गया था। आनन-फानन उसे परिजन महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। प्लास्टिक सर्जन ने बच्चे का हाथ बचाने की भरपूर कोशिश की। इसके बावजूद दो उंगलियां बुरी तरह झुलस गई थी। बाद में डॉक्टर ने उन्हें काटने का फैसला लिया।
केस-2
सीपरी बाजार निवासी युवक तीन साल पहले दीपावली पर रॉकेट जला रहा था। आग लगते ही रॉकेट उड़कर किसी दूसरे व्यक्ति के चेहरे के सामने जाकर फट गया। इससे व्यक्ति का चेहरा बुरी तरह जल गया। घाव होने पर प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज में उसकी प्लास्टिक सर्जरी की गई। इसके बावजूद पहले की तरह उसका चेहरा वापस नहीं आ सका।
केस-3
तीन-चार साल पहले दिवाली के दौरान आवास विकास में कुछ बच्चे पटाखे जलाने के बाद एक-दूसरे की तरफ उछाल फेंक रहे थे। इसी बीच एक पटाख युवक की आंख के आगे फटा, जिससे बारूद और कंकड़ आंखों में चला गया। उसके आंखें के सामने धुंध छा गई। आई सर्जन के उपचार के बाद भी एक आंख नहीं बचाई जा सकी, जबकि दूसरी आंख की भी रोशनी कम हो गई।
बोले डॉक्टर
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दीपावली पर आग, बारूद से जलने वाले मामले दोगुने हो जाते हैं। त्योहार शुरू होने से पहले से लेकर बाद तक बम, पटाखे आदि से जलने के केस आते रहते हैं। कई मामलों में इतने गंभीर केस आए कि उन्हें पहले की तरह ठीक नहीं किया जा सका। ऐसे में लोगों को हादसों से सबक लेते हुए सतर्क रहना चाहिए। - डॉ. सुधीर कुमार, प्लास्टिक सर्जन, मेडिकल कॉलेज।
आंख तो बेहद नाजुक होती है। दीपावली पर लगातार आंख चोटिल होने के मामले आते रहते हैं। खासकर बच्चे की आंखों को नुकसान पहुंचने के केस ज्यादा रहते हैं। कुछ मामलों में तो आंख इतनी क्षतिग्रस्त हो गई कि दोनों आंखों की रोशनी तक बचाई नहीं जा सकी। वहीं, कुछ मामलों में एक की आंख पूरी और दूसरी की काफी रोशनी चली गई। - डॉ. अभिषेक गुप्ता, आई सर्जन।