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स्कूल कालेजों में अग्निशमन यंत्र बने शोपीस

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झांसी। महानगर में कई ऐसे विद्यालय है, जो तंग गलियों में हैं। इनमें से कई विद्यालयों में अग्निशमन यंत्रों का अभाव है। अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को कई विद्यालयों में पड़ताल की। इसमें पाया, कि
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विद्यालयों में आग बुझाने के यंत्र सिर्फ दिखावे के लिए रखे है। इनमें कई यंत्र एक्सपायरी डेट के मिले तो कई खाली। किसी भी संभावित अग्निकांड से बचने के लिए स्कूल - कॉलेजों ने कोई गंभीर कदम नहीं उठाया है।
शासन के स्पष्ट निर्देश है, कि सभी स्कूल - कॉलेजों में अग्निशमन यंत्र रखे जाए। लेकिन प्राइमरी से लेकर इंटर और डिग्री कॉलेज तक के अधिकांश विद्यालयों में इन निर्देशों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। महानगर में 250 से अधिक छोटे - बडे़ विद्यालय संचालित है। इनमें पानी वाली धर्मशाला, सागर गेट, छनियापुरा, अलीगोल, बड़ागांव गेट, बंगलाघाट सहित कई इलाके है। जहां तंग गलियों में स्कूल - कॉलेज संचालित है। पड़ताल में कई स्कूलों व कॉलेजों में अग्निशमन यंत्र मिले, लेकिन यह काफी पुराने हो चले थे। इनकी गैस रिफलिंग भी नहीं हुई है। जबकि इनके उपकरणों में गैस सिर्फ एक साल तक ही आग बुझाने के लायक रहती है। इनमें से कई विद्यालयोें में विद्यार्थियों के आवागमन के लिए सिर्फ एक ही गेट है। ऐसे में अगर स्कूल व कॉलेजों में कोई हादसा हो जाए तो बचाव कार्य के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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सभी स्कूल-कॉलेजों में अग्निशमन यंत्रों को जांचने के लिए अभियान चल रहा है। जहां कमी पाई जाएगी, वहां नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। सभी स्कूलों में यंत्रों को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
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जेके ओझा मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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