झांसी। फीफा विश्वकप की शुरुआत के साथ झांसी में भी फुटबॉल का जुनून लगातार बढ़ता जा रहा है। झांसी के खिलाड़ी विश्वकप मुकाबलों को सिर्फ मनोरंजन के लिहाज से नहीं बल्कि सीखने के रूप में देख रहे हैं। युवा फुटबॉलर दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों की फिटनेस, स्पीड, पासिंग, फिनिशिंग और रणनीति को करीब से समझने के लिए उत्साहित हैं।
फुटबॉल फेडरेशन के सचिव वहीद खान ने बताया कि जिले में कुछ वर्षों में फुटबॉल का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्कूल और क्लब स्तर पर लगातार प्रतियोगिताएं होने से खिलाड़ियों की संख्या भी बढ़ रही हैं। विश्वकप जैसे बड़े आयोजन से युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और खुद को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलती है।
देखने को मिलेगी ,नई रणनीति, नई तकनीक
एशियन फुटबॉल खिलाड़ी और कोच गगन वर्मा ने कहा कि विश्वकप दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का मंच है, यहां हर मुकाबले में नई रणनीति और नई तकनीक देखने को मिलेगी। युवा खिलाड़ियों को गोल और नतीजों के साथ खिलाड़ियों की पोजिशनिंग, टीमवर्क और गेम कंट्रोल पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे उनका खेल मानसिक और तकनीकी दोनों स्तर पर मजबूत होगा।
खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग क्लास है फीफा
फुटबॉल के राष्ट्रीय खिलाड़ी और कोच शेख रफीकुद्दीन ने कहा कि विश्वकप युवा खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग क्लास की तरह होता है। बड़े खिलाड़ियों का दबाव में रणनीति बनाना, डिफेंस तोड़ना और मैच की गति को नियंत्रित करना, उनसे यह सीखना बेहद जरूरी है। झांसी के खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही दिशा और लगातार मेहनत की है।
अनुशासन, फिटनेस और समर्पण की सीख
सी लाइसेंस कोच और सब जूनियर राष्ट्रीय खिलाड़ी आदित्य सिंह ने कहा कि झांसी में फुटबॉल का माहौल में पहले से अब बेहतर हुआ है। फुटबॉल खिलाड़ियों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। विश्वकप जैसे आयोजन, युवाओं में अनुशासन, फिटनेस और समर्पण की भावना पैदा करते हैं।
रणनिति बनाने की सोच का होता है विकास
संतोष ट्रॉफी खिलाड़ी शक्ति यादव ने कहा कि विश्वकप के मुकाबलों को देखने से रणनीति बनाने की सोच का विकास होता है। बड़े खिलाड़ी मैदान पर किस तरह कम्युनिकेशन करते हैं, मौके बनाते हैं और पूरे मैच में फिटनेस बनाए रखते हैं, यह युवा खिलाड़ियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण सीख है। फुटबॉल ताकत के साथ दिमाग और धैर्य का भी खेल है।
गोल करने का तरीका और फिनशिन
युवा खिलाड़ी शानु यादव ने कहा कि वह खास तौर पर स्ट्राइकर खिलाड़ियों की मूवमेंट और फिनिशिंग पर नजर रखेंगे। विश्वकप देखने से पता चलता है कि बड़े खिलाड़ी छोटे मौकों को भी गोल में कैसे बदल देते हैं। इससे युवा खिलाड़ियों को अपने खेल में सुधार करने की प्रेरणा मिलती है।
आठ वर्षीय स्ट्राइकर खिलाड़ी आदित्य ने बताया कि वह सीनियर खिलाड़ियों से फिटनेस को बनाए रखने के साथ विषम परिस्थितियों में गोल करने की कला को समझने का प्रयास करेंगे।