किसानों को अब रासायनिक खाद लेने के लिए पॉस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन पर अंगूठा लगाना होगा। इसके लिए खाद विक्रेताओं को पॉस मशीन के वितरण का काम शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि इससे न केवल रासायनिक खाद की कालाबाजारी रुकेगी, बल्कि छूट का पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में जाएगा।
कृषि भवन में उप कृषि निदेशक डॉ. यूपी सिंह ने पॉस मशीन का वितरण किया। जिले में 190 खाद बिक्री केंद्र हैं, इनमें से 58 सहकारी समितियां हैं। अब पॉस मशीनें आ गई हैं और दुकानदारों को वितरण का काम शुरू हो गया है। पहले दिन नौ सहकारी समितियों को मशीनें बांटी गईं, इसमें साधन सहकारी समिति ककरबई, टोड़ी, भसनेह, बामौर, एरच, अस्ता, हैवतपुरा, इस्किल और क्रय विक्रय समिति गुरसराय शामिल हैं। वहीं, बीस उर्वरक विक्रेताओं को भी पॉस मशीनें बांटी गईं। इफ्को के जसवीर सिंह ने बताया कि किसान को उर्वरक की दुकान पर आधार कार्ड लेकर जाना होगा। मशीन में किसान अपना अंगूठा लगाएगा और ओके होने के बाद उसे खाद की बोरियां दे दी जाएंगी।
इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी डॉ. बीआर मौर्य, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता रामेश्वर प्रसाद गुप्ता, इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक जसवीर सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार उपस्थित रहे।
क्या है पॉस?
पॉस (प्वाइंट आफ सेल) स्वाइप मशीन की तरह होती है, इसमें संबंधित क्षेत्र के किसानों का किसान बही के आधार पर पूरा ब्योरा जुटाया जाता है। दुकान में कितनी बोरी खाद है, कितनी बोरियां बेची गईं और किस किसान को बेची गईं। इसका लेखा-जोखा भी पॉस मशीन में दर्ज रहेगा, जिससे बार-बार खाद खरीदने वाले किसानों का भी पता चल जाएगा।
ऐसे करती है काम
जब किसान का आधार नंबर मशीन से लिंक कर दिया जाएगा तो सिर्फ उसी किसान का ब्योरा स्क्रीन पर आएगा, जिसका अंगूठा मशीन में मैच करेगा। किसान जितनी बोरी खाद खरीदेगा, वह ब्योरा भी आनलाइन अपडेट हो जाएगा। यदि कोई दूसरा व्यक्ति किसान बनकर खाद लेना चाहेगा तो संभव नहीं होगा। मशीन में जिओ के अलावा अन्य सभी सिम काम करेंगी। जिला के दूरदराज क्षेत्र में वाईफाई की सुविधा नहीं मिल पाएगी, जहां यह ब्राडबैंड के माध्यम से काम करेगी।