बुंदेलखंड में छुट्टा जानवरों की समस्या के समाधान के लिए अब ‘सेक्स सीमन’ से गायों की नस्ल में सुधार किया जाएगा। सेक्स सीमन (क्रास बीडिंग) से छुट्टा घूमने वाली गायों की नस्ल को थारपरकर गाय की नस्ल में बदला जाएगा, जिससे केवल बछिया पैदा होगी और यह बछिया आठ से दस लीटर दूध देगी। थारपरकर गाय के लिए सीमन सौ रुपये में मिलेगा।
बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा में छुट्टा जानवरों की संख्या बहुत अधिक है। जानवरों को छुट्टा छोड़ने की प्रमुख वजह गाय का दूध न देना है। किसानों को लगता है कि गाय जितना खाती है, उतना दूध नहीं देती है। इस कारण वह उसे छुट्टा छोड़ देते हैं। प्रदेश सरकार ने इस पर रोक लगाने के लिए गायों की नस्ल बदलने का निर्णय लिया है। बुंदेलखंड की गायों को थारपरकर सांड के सीमन से क्रास कराया जाएगा, जिससे यहां पर भी थारपरकर नस्ल की गायें पैदा होंगी।
इस सीमन की खासियत यह है कि 73 प्रतिशत तक गायें पैदा होंगी। शासन ने इस सीमन की दरें तय कर दी हैं। बुंदेलखंड में सौ रुपये में एक बार गाय को क्रास कराया जा सकेगा, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में एक बार क्रास कराने के लिए तीन सौ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
पैरावेट के जरिए चलेगा अभियान
नस्ल सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत पशुपालन विभाग गायों की नस्ल बदलने के लिए पैरावेट्स के माध्यम से अभियान चलाएगा। इन्हें सौ रुपये प्रति बछड़ा बधियाकरण का दिया जाएगा। अभी दो साल का लक्ष्य है, जिसमें प्रत्येक वर्ष सात हजार गायों की नस्ल बदलेगी और 12 हजार सांडों का बधियाकरण होगा।
शासन ने लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। एक साल में सात हजार गायों में सेक्स सीमन के जरिए थारपरकर नस्ल की गायें पैदा की जाएंगी।
- डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी