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खेती के लिए अलग से बनाए जाएंगे फीडर

Fri, 03 Jun 2016 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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vikas path karkirm, jhansi news - फोटो : amar ujala
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झांसी। केंद्र सरकार ने जून 2018 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है। इस योजना के तहत खेती के काम के लिए अलग से फीडर बनाए जाएंगे। सरकार ने आम बजट में कृषि क्षेत्र के आवंटन को 15,809 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 35,984 करोड़ कर दिया है, जो दोगुना से अधिक है। किसानों को सस्ता व रियायती ऋण देने के लिए सरकार ने नौ लाख करोड़ रुपये दिए हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के ऋण में प्राकृतिक आपदा के समय ब्याज में छूट का प्रावधान किया गया है।
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यह बात भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान ग्रासलैंड  (आईजीएफआरआई) में बृहस्पतिवार को आयोजित लाभार्थी किसान सम्मेलन व प्रदर्शनी ‘विकास पर्व’ को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि व कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कही।  

उन्होंने कहा कि दलहन व तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने की कई योजनाएं शुरू की गई हैं, ताकि दाल व खाद्य तेल के मामले में आयात निर्भरता को समाप्त किया जा सके। कृषि प्रसार प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने देश के लगभग सभी ग्रामीण जिलों में स्थापित कृषि विज्ञान केंद्रों को आधुनिक व सभी सुविधाओं से लैस करने का निर्णय लिया है। किसान केंद्र की हर योजना का लाभ लें सके, इसके लिए किसान चैनल पर 24 घंटे जानकारी देने की व्यवस्था की गई है। इस मौके पर किसान कलेंडर का विमोचन किया गया।  
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इस मौके पर शहरी विकास राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो ने कहा कि योजनाओं का लाभ लेने पर ही किसान आगे बढ़ सकेंगे। दिल्ली के सांसद महेश गिरी ने कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड को लेकर किसानों में जागृति होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकार में नीति, नियत व नेतृत्व तीनों में खोट थी, इस कारण केंद्र से चलने वाला एक रुपये जनता तक पहुंचने में दस पैसे में बदल जाता था। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। सम्मेलन में झांसी, ललितपुर व मप्र के दतिया के अस्सी गांवों के किसानों ने भाग लिया। मंच पर आईजीएफआरआई के निदेशक पी के घोष, पूर्व उपसभापति मानवेंद्र सिंह, सदर विधायक रवि शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय दुबे, महानगर अध्यक्ष प्रदीप सरावगी आदि मौजूद रहे।

किसानों ने साझा की बातें
सम्मेलन में आए किसानों ने अपनी समस्याएं कृषि मंत्री से साझा कीं। इस दौरान दतिया क्षेत्र के सनौरा निवासी छत्रपाल पटैरिया ने कहा कि उनकी कृषि भूमि में जिंक की मात्रा कम थी। मृदा परीक्षण के उपरांत जो समाधान उन्होंने अपनाए उससे उनको बड़ा लाभ हुआ। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दतिया क्षेत्र में खेतों का पानी रोकने की चल रही योजनाओं पर अफसर सिर्फ औपचारिकताएं निभा रहे हैं।

दतिया क्षेत्र के गरेरा निवासी दशरथ सिंह यादव ने कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड बनवाने के बाद उन्होंने मिट्टी का परीक्षण कराया। इससे जहरीली हो चुकी उनकी जमीन की उर्वरकता बढ़ गई है। अवधेश प्रताप सिंह ने सुझाव रखा कि किसानों तक योजनाएं पहुंचे, इसके लिए प्रचार- प्रसार की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। बांदा निवासी प्रेम सिंह का कहना था कि परिवार बढ़ने से हर बीस साल में खेती के बंटवारे हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में दाखिल खारिज करने की व्यवस्था स्वत: हो जाए, ताकि किसान आर्थिक परेशानी से बच सके।

नत्थू सिंह तोमर ने कहा कि ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने आंवला व सोस पर काम किया। इससे वह किसान से व्यापारी बन गए। सौवीर सिंह यादव ने सुझाव रखा कि सीमांत की तरह बड़े किसानों के लिए भी सरकार को योजनाएं चलानी चाहिए।

मृदा परीक्षण से मिला किसानों को लाभ
मृदा परीक्षण (मिट्टी की जांच) कराने के बाद अपनाए गए उपायों से कई किसानों को लाभ मिला। बड़ागांव ब्लाक के पाड़री निवासी रामसहाय ने बताया कि उन्होंने चारा अनुसंधान से तकनीकी सलाह ली थी। सलाह को अपनाने के बाद उनके खेत के आसपास पर्याप्त चारा जानवरों के लिए होने लगा है। बावल टाड़ा निवासी चंद्रभान सिंह ने बताया कि उन्होंने अमरूद के पेड़ लगाए थे।

मगर, सूखे के कारण पेड़ सूख रहे हैं। नदीगांव निवासी अरविंद सिंह यादव का कहना था कि मृदा परीक्षण कराने से उनकी उपज बढ़ गई है। रक्सा क्षेत्र के ग्राम ढिकौली निवासी रामेश्वर प्रसाद दुबे ने कहा कि चारा संस्थान से वह बीज, खाद ले जाते हैं, इससे उनकी खेती में उत्पादकता बढ़ गई है। 
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