झांसी। अगर सब्जियों में स्वाद नहीं आ रहा तो मान लीजिए कि उनकी पैदावार रासायनिक खाद से हुई है। ये सब्जियां स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। लेकिन, थोड़ी सी मेहनत से स्वादिष्ट सब्जियों का लुत्फ उठाया जा सकेगा और निरोगी भी रह पाएंगे। इसके लिए जरूरी नहीं कि आपके पास बगीचा, लॉन या खेती हो। शहर के रहने वाले अरविंद वशिष्ठ ने रासायनिक खाद से बनी सब्जियों का सेवन न करने के लिए अपनी छत को ही खेत बना लिया है। वह छत पर देसी के साथ-साथ विदेशी सब्जियां तक उगा रहे हैं। देसी की तुलना में विदेशी सब्जियां ज्यादा आसानी से उग रही हैं।
शहर के गोपाल नीखरा निवासी अरविंद वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले अपने घर की छत पर सब्जियों की खेती करना शुरू कर दिया था। इसके पीछे उन्होंने एक बड़ा कारण बताया। कहा कि उनके एक रिश्तेदार खेती के दौरान बिना मास्क पहने रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग कर रहे थे। कीटनाशक हवा के जरिए उनकी सांसों में चला गया। इसके बाद उनकी आंत गल गईं। तब उनके मन में आया कि रसायन के प्रयोग से पैदा होने वाली सब्जियां सेहत के लिए कितनी हानिकारक होती होंगी। बस तभी से उन्होंने अपने घर की छत पर सब्जियों की खेती करने की ठान ली।
सबसे पहले उन्होंने ऑनलाइन बैंगन, टमाटर के देसी बीज मंगवाकर बुवाई कर दी। जब कीड़े पड़ने लगे तो जैविक कीटनाशक भी खुद तैयार किया। इसके लिए नीम, कनेर, धतूरा, अकउआ के पत्ते मिट्टी के बर्तन में रखकर एक माह बाद उबाल लिया। फिर नीम का तेल मिलाकर सब्जियों पर छिड़क दिया। इससे कीट पर नियंत्रण में सफलता मिली।
जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियों का होता है अलग स्वाद
पूरे परिवार के लोग करते हैं छत पर बागवानी
झांसी। छत पर सब्जियां उगाने वाले शहर के गोपाल नीखरा निवासी अरविंद वशिष्ठ का कहना है कि जैविक तरीके से उगाई जाने वाली सब्जियों का स्वाद कीशनाशक के प्रयोग से पैदा की जानी सब्जियों से अलग होता है। इनका स्वाद बहुत अच्छा होता है। अब तक वह चुकंदर, फूल गोभी, भिंडी, कद्दू, लौकी, तुरई, बैंगन, पालक, मैथी, लंबी फली, सेम, लाल पालक, मूली, अरबी, हल्दी करेला, टमाटर, हरी धनिया व मिर्च, सिमला मिर्च आदि लगा चुके हैं। हाल ही में उन्होंने विदेशी सब्जियों की खेती भी शुरू कर दी है। सीजन के अनुसार वह ब्रोकली, लेट्यूस, पोकचो आदि विदेशी सब्जियां उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देशी सब्जियों की तुलना में विदेशी सब्जी ज्यादा आसानी से बढ़ जाती हैं। देसी गोभी में तो एक ही बार फूल आता है लेकिन विदेशी गोभी (ब्रोकली) में दो बार फूल आ जाते हैं। कहा कि अब उनकी पत्नी दीप्ति व परिवार के अन्य सदस्य भी खेती में मदद करने लगे हैं। वह नियमित सुबह छह से आठ बजे तक गुड़ाई, पानी देने आदि का काम करते हैं।
बोतल से बनाया ड्रेनेज, त्रिपाल से रोक रहे सीलन
छत पर खेती करना बेहद आसान है। अरविंद बताते हैं कि छत पर ज्यादा लोड न पड़े इसलिए अधिक से अधिक गमले लगाने के बजाए त्रिपाल पर मिट्टी डाल दी। एक तरफ से बोतल काटकर दूसरी तरफ से ढक्कन खोल दिया। इसको नाली के पास लगा दिया, इससे पानी खुद ब खुद निकल जाता है। दीवारों पर सीलन भी नहीं आती। उन्होंने थर्माकोल के बक्सों का भी उपयोग किया है। इसमें कॉकपिट, वर्मी कंपोस्ट, गोबर की खाद के साथ मिट्टी मिलाकर उसमें बीज डाल रहे हैं।
स्वाद में अंतर, जल्दी भी पक जाती
अरविंद ने बताया कि रासायनिक खाद व कीटनाशक और जैविक खाद का प्रयोग कर तैयार होने वाली सब्जियों में काफी अंतर है। जैविक खाद वाली सब्जियां जल्दी तैयार हो जाती हैं। वह जल्दी काली भी नहीं पड़ती हैं। इसके अलावा काफी स्वादिष्ट होती हैं।