लखेरी बांध पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को किसानों ने घेरा
बेरवई। लखेरी बांध में मंगलवार को सिंचाई विभाग के एसी, अधिशासी अभियंता, एसडीओ और अन्य अधिकारियों का किसानों ने घेराव किया। ग्रामीणों ने कहा कि पहले जिनकी रजिस्ट्री हो गई है उनको मुआवजा दिया जाए। इसके बाद वह लोग अपनी जमीन की रजिस्ट्री करेंगे। किसानों के विरोध के कारण अधिकारी सर्किट हाउस चले गए। इसके बाद मौके पर पुलिस पहुंच गई। टोड़ीफतेहपुर थानाध्यक्ष अजमेर सिंह भदौरिया ने किसानों से कहा कि जल्द ही एसडीएम आकर आप लोगों की समस्या का समाधान करेंगे। इसके बाद किसान वहां से लौट आए।
लखेरी बांध परियोजना के तहत गांव बुढ़ाई के किसानों की जमीन ली गई है। सिंचाई विभाग का कहना है कि इस वर्ष बांध को 184 मीटर पानी से भरा जाएगा। इतना पानी भरने के बाद बुढ़ाई गांव में पानी भर जाएगा। पिछले वर्ष 182 मीटर पानी भरने पर लोगों के घरों में पानी भर गया था। लोगों का कहना है कि जब हमें हमारा मुआवजा ही नहीं दिया जा रहा तो हम लोग घर खाली कहां से कर दें । जहां पर इन लोगों ने प्लाट दिए हैं वहां पर न तो बिजली की व्यवस्था नहीं है। सड़क भी नहीं है। कुछ लोगों को प्लाट दिए भी गए हैं तो उन लोगों को मकान बनाने के लिए समय नहीं दिया जा रहा है। इसलिए वह मजबूरी में गांव में ही रहेंगे। लखेरी डैम पर मंगलवार को सिंचाई विभाग के एसी, एक्सीयन, एसडीओ आदि अधिकारी आए। इस पर बुढ़ाई के ग्रामीण भी वहां पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि हमारी जमीन की रजिस्ट्री हो रही है तो मुआवजा हमारे लड़कों को क्यों नहीं दिया जा रहा। विभाग का कहना है 31 दिसंबर 2008 तक जो लोग भी 18 वर्ष से ऊपर थे उनको ही प्लाट एवं अनुकंपा राशि दी गई है। जबकि ग्रामीणों की मांग है की रजिस्ट्री अब हो रही है तो सभी बालिगों के नाम जोड़े जाएं।
हरीराम का कहना है कि रजिस्ट्री कराने के बाद विभाग ने जो प्लाट दिया है वह दूसरे व्यक्ति को दे दिया। उसने मकान भी बनवा लिया। जबकि वह इस गांव का निवासी ही नहीं है। जमीन भी चली गई लेकिन प्लाट नहीं मिला।
लक्ष्मण सिंह का कहना है कि विभाग ने हमसे रजिस्ट्री करवा ली। हमारे लड़के नहीं हैं। एक लड़की है। उसका नाम विभाग वाले नहीं जोड़ रहे हैं जबकि नियम के तहत बच्चों को जोड़ा जाएगा।
प्रधान लक्ष्मी प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी ग्राम वासियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। पैसे लेकर बाहर के व्यक्तियों को भी प्लाट दिए जा रहे हैं जबकि यहां के लोग वंचित हैं। ग्राम के सभी लोगों को जब तक मुआवजा, प्लाट एवं अनुकंपा राशि नहीं मिल जाती तब तक हम लोग गांव खाली नहीं करेंगे क्योंकि हम लोगों के पास अन्य जगह पर मकान भी नहीं हैं। यदि 184 मीटर पानी भरा जाएगा तो कुछ भी होता है। इसका पूरी जिम्मेदारी सिंचाई
विभाग और प्रशासन की होगी। विवेक यादव का कहना है कि हम लोगों को न तो कोई मुआवजा दिया गया न कोई प्लाट दिए गए। पूरा मुआवजा मिलने के बाद ही हम लोग अपने मकान और जमीन छोड़ेंगे।