संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जनपद में गेहूं खरीद के दौरान अव्यवस्थाएं लगातार सामने आ रही हैं। खतौनी के डिजिटल होने के बावजूद किसानों से लेखपाल के हस्ताक्षर मांगे जा रहे हैं। आरोप है कि बिना हस्ताक्षर के क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं की जा रही, जिससे किसानों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
30 अप्रैल से जिले में 66 क्रय केंद्र संचालित किए गए थे। शुरुआत में खरीद ने गति पकड़ी, लेकिन बीच-बीच में बोरों की कमी और फार्मर आईडी जैसी समस्याओं ने किसानों को परेशान किया। फार्मर आईडी की अनिवार्यता हटने के बाद कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन अब बोरों की कमी और नए नियमों के चलते किसान फिर मुश्किल में हैं।
किसानों का कहना है कि बोरों की पर्याप्त उपलब्धता न होने से उन्हें घंटों तौल का इंतजार करना पड़ता है। मजबूरी में कई किसान अपनी उपज आढ़तियों को कम कीमत पर बेच रहे हैं। वहीं, अब डिजिटल खतौनी होने के बावजूद लेखपाल के हस्ताक्षर की शर्त से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
रोहतक से मंगाए गए बोरे
बोरों की कमी को दूर करने के लिए शासन स्तर पर एक फर्म को जिम्मेदारी दी गई है। रोहतक की कंपनी प्रदेशभर में बोरों की आपूर्ति करेगी। जनपद को जल्द ही करीब 1300 गांठ बोरे मिलने की उम्मीद है, जिससे समस्या में कुछ राहत मिल सकेगी।
किसान बोले -
बंगरा के किसान देवेंद्र राजावत का कहना है कि डिजिटल खतौनी होने के बाद भी लेखपाल के हस्ताक्षर के लिए किसानों को वापस भेजा जा रहा है।
पंकज पाराशर (बड़ागांव) के अनुसार, लेखपाल से हस्ताक्षर कराने में समस्या इसलिए हो रही है क्योंकि उनकी ड्यूटी इन दिनों फार्मर आईडी बनाने में लगी है।
किसान नेता अविनाश भार्गव ने बताया कि इस समस्या को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया है और जल्द समाधान की उम्मीद है।
खतौनी डिजिटल होने पर लेखपाल के हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है। किसान सीधे क्रय केंद्र पर जाकर गेहूं बेच सकते हैं। यदि कहीं ऐसी शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - संतोष पटेल, खाद्य विपणन अधिकारी