झांसी। सरकार द्वारा बनाए गए नए कृषि कानून के विरोध व आंदोलन का सबसे अधिक असर जिले के व्यापार पर पड़ा है। जिले में मशीनरी, स्पोर्ट्स कपड़ा, ऑटो मोबाइल के अलावा सबसे अधिक असर गर्म कपड़ों के कारोबार पड़ा है। जिसके चलते कारोबारियों का बुरा हाल है। ट्रांसपोर्ट सुविधा मुहैया नहीं होने के कारण गर्म कपड़ों का माल नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते दुकानदारों को पुराना माल ही बेचना पड़ रहा है। अनुमान के अनुसार कारोबार को लगभग दस करोड़ से अधिक नुकसान हुआ है।
जिले में तीन सौ से अधिक ट्रांसपोर्ट संचालित किए जा रहे हैं। सर्दी के सीजन की शुरु होते ही स्वेटर, जैकेट, मफलर, ग्लव्स, टोपा व गर्म कपड़ों के कारोबार में तेजी आती है। गर्म कपड़ों के कारोबारियों द्वारा पंजाब प्रांत के लुधियाना, चंडीगढ़, सोनीपत व पानीपत से लाकर सप्लाई किया जाता है। लेकिन किसान आंदोलन के कारण पंजाब से आने वाले सभी रास्तों को किसानों द्वारा पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। जिसके चलते ट्रकों के पहिये थमे हुए हैं और माल की आपूर्ति होना संभव नहीं हो पा रही है। जिसका खमियाजा गर्म कपड़ा कारोबारियों को उठाना पड़ रहा है। नया माल नहीं मिल पाने के कारण शहर के बाजारों में पिछले साल का माल ही बेचा जा रहा है। वहीं, ललितपुर, जालौन व ग्रामीण इलाकों में शहर से ही माल को भेजा जाता है।
छह ट्रकों को माल लेने के लिए पंजाब भेजा था। लेकिन दिल्ली में किसान आंदोलन होने के कारण सभी वहीं पर खड़े हुए हैं। ऐसे मेें काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
हैप्पी चावला, ट्रांसपोर्ट संचालक
शादियों के सीजन के चलते फर्नीचर व्यापारियों का फर्नीचर लेने के लिए चार ट्रक दिल्ली के लिए रवाना किए गए थे। लेकिन आंदोलन होने के कारण ट्रकों के चक्के जाम हैं।
कंवलजीत अंसल, ट्रांसपोर्ट संचालक
सागर, इंदौर, जालौन व ललितपुर सहित कई शहरों में माल भेजते हैं। लेकिन दिल्ली की ओर से आने वाला ही माल झांसी नहीं आ रहा है। काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
धर्मेंद्र कुमार अग्रवाल, ट्रांसपोर्ट संचालक
बीस दिन पहले गर्म कपड़ों के माल की बुकिंग की गई थी। लेकिन अब तक ट्रांसपोर्ट पर माल नहीं आया है। जिसके चलते ग्राहकों को पुराने कपड़ों को ही बेचना पड़ रहा है।
इजहार, दुकानदार
ट्रांसपोर्ट बंद होने के कारण अन्य संसाधनों से ही थोड़ा बहुत माल ले आ रहे हैं। इसके अलावा पिछली साल का माल बेच रहे हैं। जिसके चलते काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रवि साहू, दुकानदार
साल भर सीजन का इंतजार करते हैं। लेकिन इस बार आंदोलन होने के कारण शहर की किसी भी दुकान पर नया माल नहीं है। जिसके चलते ग्राहक वापस लौट रहे हैं।
अनिल, दुकानदार