झांसी। किसान आंदोलन की वजह से मंडी समिति का राजस्व पचास फीसदी घट गया है। आंदोलन की वजह से झांसी में कश्मीर से सेब, नागपुर से संतरा तो महाराष्ट्र के नासिक से प्याज कम आ पा रहा है। इसके अलावा झांसी से निर्यात होने वाली उपज पर भी असर पड़ा है।
झांसी में फलों के मामले में विभिन्न राज्यों से सेब, संतरा, चीकू, पपीता आता है। किसान आंदोलन की वजह से कश्मीर से सेब तो नागपुर से संतरा के आयात पर असर पड़ा है। नासिक से प्याज के आयात में भी काफी कमी आई है। गुजरात और महाराष्ट्र से मूंगफली भी आती है, जो कि कम आ पा रही है। बताया गया कि किसान आंदोलन के पहले एक दिन में 40 हजार बोरी मूंगफली आती थी, जो अब घटकर 10 से 15 हजार बोरी रह गई है। वहीं, उड़द की आयात भी ढाई हजार बोरी से घटकर 500 और तिल दो हजार बोरों से घटकर 300 बोरे रह गई है। पिछले साल एक से दस दिसंबर तक गल्ला, फल और सब्जी मंडी को मिलाकर 32 लाख रुपये मंडी समिति की आय हुई थी, जो अब घटकर 15 लाख बची है। इससे स्पष्ट है कि किसान आंदोलन के कारण सीधे पचास फीसदी मंडी समिति की आय घटी है।
पिछले साल की तुलना में इस साल दिसंबर के शुरूआती दस दिनों की मंडी समिति की आय में पचास फीसदी तक की कमी आई है। यहां की उपज बाहर कम जा रहा रही है। इसके अलावा बाहर से आने वाला प्याज, संतरा, मूंगफली आदि भी कम आ पा रहा है। - पंकज शर्मा, सचिव, मंडी समिति।
पहले एक दिन में 40 हजार बोरी मूंगफली झांसी आती थी, जो किसान आंदोलन के कारण अब घटकर 10 से 15 हजार बोरे रह गई है। उड़द भी ढाई हजार बोरे से घटकर 500 और और तिल दो हजार बोरे से घटकर 300 बोरे रह गई है। - उमेश गुप्ता, अध्यक्ष, गल्ला मंडी व्यापार मंडल।