झांसी। सोलर पंप के लिए किसानों ने दिए कुल 1.78 करोड़ रुपये के बैंक ड्राफ्ट कृषि अफसरों की लापरवाही से रद्दी हो गए। अब तक किसानों को न सोलर पंप मिले न उनका पैसा ही वापस हुआ। जिस कंपनी को सोलर पंप आपूर्ति का काम मिला, वह अचानक से लापता हो गई। अफसर भी अब कंपनी का पता नहीं लगा पा रहे। वहीं, परेशान किसान अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
डीजल एवं बिजली पर किसानों की निर्भरता खत्म करने के लिए उनको सोलर पंप दिए जाने थे। पीएम कुसुम योजना के जरिए केंद्र सरकार ने सब्सिडी पर किसानों को सोलर पंप देने का निर्णय लिया। बुंदेलखंड में किसानों को उबारने के लिए यहां दूसरे जनपदों के मुकाबले अधिक संख्या में लक्ष्य तय किए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3 एचपी (एसी) के 105 पंप, डीसी के 92 पंप एवं 5 एचपी(एसी) के 49 पंप दिए जाने थे। तीन एचपी के लिए किसानों से 66223, 67748 एवं पांच एचपी सोलर पंर केलिए 94764 रुपये का ड्राफ्ट मांगा गया। सरकार भी डेढ़ से दो लाख रुपये की सब्सिडी दे रही थी। अनुदान पर सोलर पंप मिलने की सूचना पर किसानों में होड़ मच गई। लेकिन पहले आने वाले 246 किसानों से ही बैंक ड्राफ्ट लिए गए। कृषि अफसरों ने यह ड्राफ्ट बिना निर्देशों की परवाह किए गुजरात की रोटोमैग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से बनवा लिए। कुछ दिनों तक तो कंपनी के प्रतिनिधि अधिकारियों के संपर्क में रहे लेकिन, अचानक से गायब हो गए। इसके बाद अफसर 1.78 करोड़ के ड्राफ्ट फाइलों में दबाकर भूल गए। कंपनी के गायब हो जाने की सूचना लखनऊ निदेशालय को भी नहीं दी गई। इसी माह करोड़ों रुपये के यह ड्राफ्ट ओवरडेट हो गए। अधिकारियों का कहना है कि संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई लेकिन, कंपनी प्रतिनिधियों ने कोई जवाब नहीं दिया।
ऊंची ब्याजदर पर पैसे लेकर जमा किए थे किसानों ने ड्राफ्ट
सोलर पंप के लिए किसानों के भीतर इस कदर ललक थी कि कई किसानों ने पास में पैसा न होने पर भी ऊंची दरों में ब्याज में पैसा लेकर ड्राफ्ट बनवाकर जमा कराया। लेकिन तीन महीने बाद भी उनको न सब्सिडी मिली न ही उनको सोलर पंप मिले। किसानों को उम्मीद थी सोलर पंप मिल जाने से रबी सीजन में सिंचाई का खर्च बच सकेगा लेकिन, वह खर्च भी उनको देना पड़ रहा। गरौठा के प्यारेलाल बड़ौनियां का कहना है उन्होंने बारह फीसदी ब्याज पर एक लाख रुपये लेकर बैंक ड्राफ्ट जमा किया था। सिमरावरी के रघुराज यादव के मुताबिक घर में रखे गहने गिरवी रखकर उन्होंने बैंकड्राफ्ट बनवाए लेकिन, उनकी पूंजी भी फंस गई।
कई बार कंपनी प्रतिनिधियों से संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन उनकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं आया। उनका कहना है इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जा रहा है। शासन के निर्णय के मुताबिक ही आगे कार्रवाई की जाएगी। केके सिंह, प्रभारी उपनिदेशक