झांसी। आश्रय स्थलों पर अब होटल जैसी सुविधाएं मिलेंगी। डोरमैट्री की तर्ज पर आश्रय स्थलों को संवारने का काम किया जा रहा है, जिसमें सोने के लिए पलंग और मनोरंजन के लिए एलईडी टीवी लगाई जाएंगी। इसके अलावा मनारंजन और सुख सुविधाओं के लिए कई और व्यवस्थाओं से लैस किया जाएगा।
नगर निगम ने आश्रय स्थलों में आधुनिक सुविधा देने का प्रस्ताव बनाया था, जिसे मंजूरी मिल गई। तकरीबन 37 लाख का बजट मिलते ही कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने आश्रय स्थलों को संवारने का काम शुरू कर दिया। मेडिकल कॉलेज के सामने और लहरगिर्द में 100-100 बेडों की डोरमैट्री तैयार कर ली गई है। वहीं, बस स्टैंड स्थित आश्रय स्थल का काम तेजी से कराया जा रहा है।
सीएंडडीएस इंजीनियर आरआर कटियार ने बताया कि आश्रय स्थल में पहली बार यह सुविधा प्रदान की जा रही है, जिसमें फर्श और टॉयलेट में टाइल्स, शुद्ध पानी के लिए आरओ, ठंडा पानी के लिए फ्रिज और मनोरंजन के लिए टीवी लगाई जाएंगी। यहां महिलाओं और पुरुष के ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग होगी। दूसरी ओर दिव्यांगों को सुविधा देने के लिए व्हील चेयर, रैंप और कम ऊंचाई वाले पलंग होंगे।
रसोई में पका सकेंगे खाना
रुकने वाले राहगीरों को खाना बनाने की सुविधा भी मिलेगी। गैस, चूल्हा और बर्तन नगर निगम उपलब्ध कराएगा। जबकि, खाना पकाने का सामान स्वयं खरीदकर राहगीर को लाना होगा। अभी तक आश्रय लेने वालों को बाहर जाकर भोजन करना पड़ता है।
इनका बदलेगा स्वरूप
योजना के तहत शहर के पांच आश्रय स्थलों का स्वरूप बदला जाना है। इसमें 100-100 बेड युक्त लहरगिर्द और मेडिकल के आश्रय स्थल का काम पूरा हो चुका है। जबकि, बस स्टैंड पर 40 सीट आश्रय स्थल को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। इसके बाद नारायण बाग स्थित और कृष्णा इंक्लेव के 25-25 सीट के आश्रय स्थलों को संवारा जाएगा।
दूसरी किस्त का इंतजार
सीएंडडीएस के इंजीनियर आरआर कटियार ने बताया कि पहली किस्त में प्राप्त हुई धनराशि से अधिकांश काम हो चुका है। कुछ ही काम बाकी है उसे पूरा किया जा रहा है। अगले दो आश्रय स्थलों के लिए दूसरी किस्त का इंतजार है। बजट मिलते ही बाकी कार्य को पूरा करा लिया जाएगा।
नगर निगम की तरफ से आश्रय स्थलों को संवारने का काम किया जा रहा है। सुविधाएं मिलने से रुकने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा होगा। यह पूरी तरह निशुल्क है।
- रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त