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Jhansi News: सीबीसीआईडी की विवेचना पर भारी पड़ा चश्मदीदों का बयान

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। इस चर्चित मामले में चश्मदीद गवाहों का बयान सीबीसीआईडी की विवेचना पर भी भारी पड़ी। इस मामले की विवेचना पुलिस के साथ ही सीबीसीआईडी शाखा से भी कराई थी। सीबीसीआईडी ने अपनी विवेचना में इस मामले में नामजद रिंकू गेड़ा और बॉबी गेड़ा की उपस्थिति न पाते हुए उनके नाम बाहर कर दिए थे लेकिन, कोर्ट में जब चश्मदीदों के बयान कराए गए तब उन्होंने उनकी मौजूदगी वहां बताई। आखिरकार उनके बयानों ने ही गेड़ा बंधुओं को सींखचों के भीतर भेज दिया।
इस मामले में वादी पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में सोनू गेड़ा, रिंकू गेड़ा और बॉबी गेड़ा के नाम भी शामिल थे लेकिन, पुलिस विवेचक समेत सीबीसीआईडी की जांच में भी रिंकू और बॉबी के नाम एक ही दिन में बाहर निकाल दिए गए। सीबीसीआईडी का तर्क था कि दोनों भाई घटना के दिन वहां मौजूद नहीं थे। केस डायरी के कोर्ट में पेश होने से पहले ही गेड़ा बंधुओं के वकील ने कोर्ट के सामने सीबीसीआईडी के काटे पर्चे पेश करते हुए राहत की मांग की। सीबीसीआईडी के पर्चे वकीलों के पास देख कोर्ट भी चौंक उठी। उसने इसे गंभीरता से लेते हुए सीबीसीआईडी के विवेचक को फटकार लगाते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। वादी पक्ष ने भी अदालत से चश्मदीद गवाहों के बयान कराने की मांग की गई। चश्मदीद गवाह के तौर पर पेश हुए संचित वर्मा, घायल गवाह संजय वर्मा और चश्मदीद रवि वर्मा ने अपने बयानों में रिंकू और बॉबी की न सिर्फ मौजूदगी बताई बल्कि कोर्ट को बताया कि हमले के बाद दोनों धमकाते हुए पैदल बस अड्डे की ओर भागे थे। इनके बयान ने ही सीबीसीआईडी की विवेचना में बाहर कर दिए गए रिंकू और बॉबी को फिर से शामिल करते हुए सुनवाई शुरू की। चश्मदीदों के बयान के आधार पर ही गेड़ा बंधुओं को कोर्ट ने सजा सुनाई।
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इनसेट
इकलौते बाल अपचारी के खिलाफ अभी पोस्को कोर्ट में चल रही सुनवाई

इस मामले में वादी पक्ष की ओर से नौ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इनमें राव राजा का छोटा बेटा भी शामिल था। वादी पक्ष ने उसके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी लेकिन, बचाव पक्ष ने उसे नाबालिग बताते हुए घटना के दिन उसकी आयु 16 साल से भी कम बताई। उसके उम्र की जांच के लिए बोर्ड का गठन हुआ। बोर्ड के सामने उसके शैक्षिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे कोर्ट ने नाबालिग करार दिया। इसके बाद उसके नाम को इस कोर्ट से हटाकर पोस्को कोर्ट भेज दिया गया। लोक अभियोजन देवेंद्र पांचाल के मुताबिक अभी वहां सुनवाई चल रही है।
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सुरक्षा के रहे चाक-चौबंद इंतजाम

चर्चित मामले में सजा सुनाए जाने के मद्देनजर कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील रहा। मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर अदालत कक्ष तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बाहरी लोगों के प्रवेश पर निगरानी रखी गई।
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दोषियों के परिजन बड़ी संख्या में कोर्ट पहुंचे थे। कुछ परिजन परिसर के भीतर तक पहुंच गए, जबकि अधिक संख्या में पहुंचे लोगों को पुलिस ने बाहर ही रोक दिया। फैसले के दौरान कई परिजन घंटों तक कोर्ट परिसर के बाहर डटे रहे।
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