झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आंखों के प्रत्यारोपण के लिए आई बैंक खुलने का प्रस्ताव शासन में ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। कॉलेज कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
मेडिकल कॉलेज में मार्च 2017 में आई बैंक खुलने को मंजूरी मिल गई थी। इसके लिए लगभग 60 लाख रुपये बजट भी तय कर दिया गया था मगर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अब यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है। मेडिकल कॉलेज ने बीते जून में आई बैंक के संबंध में रिमाइंडर भी भेज दिया था। इसके बावजूद अब तक शासन से कोई संकेत नहीं मिले हैं। अब मेडिकल कॉलेज फिर से पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में प्रदेश में कानपुर, बनारस, इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज, एएमयू समेत चुनिंदा शहरों में ही आई बैंक खुली हुई हैं। इससे इन पर लोड मरीजों का लोड भी ज्यादा है। अगर झांसी में आई बैंक खुलती है, तो बुंदेलखंड समेत आसपास के कई जनपदों के मरीजों को फायदा होगा।
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15-20 मरीज हर माह जाते बाहर
हर महीने 15-20 मरीज आंख प्रत्यारोपण के लिए बुंदेलखंड से बाहर जाते हैं। यह आंकड़ा तो सिर्फ उन मरीजों का है, जो मेडिकल कॉलेज उपचार कराने के लिए आते हैं। निजी अस्पताल में आंख प्रत्यारोपण कराने में 60 हजार से एक लाख रुपये तक का खर्च आता है। जबकि, सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क अथवा मामूली दर पर प्रत्यारोपण हो जाता है।
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संसाधन व लाइसेंस जरूरी
ब्लड बैंक के लिए संसाधन के साथ ही लाइसेंस भी जरूरी होता है। शासन को लिखे पत्र में मेडिकल कॉलेज ने बजट के साथ ही प्रत्यारोपण करने की अनुमति मांगी है। बजट से ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, स्पैक्युलर माइक्रोस्कोप, डीप फ्रीजर आदि की खरीद होगी।
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जल्द स्वीकृति मिल सकती है
आई बैंक को लेकर शासन को पत्राचार किया जा चुका है। जल्द ही स्वीकृति मिलने की संभावना है। बैंक खुलने से बुंदेलखंड को बहुत फायदा होगा। - डॉ. जितेंद्र कुमार, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।