बुंदेलखंड में एक बार फिर सूखा दस्तक देने की तैयारी कर रहा है। सूखे की आहट से किसान, प्रशासन और आम लोगों की धड़कन तेज हो गई हैं। उड़द में अभी एक भी दाना नहीं आया है। कृषि विभाग ने हालात जानने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे में 33 फीसदी से अधिक नुकसान की रिपोर्ट पर सूखा मान लिया जाएगा। जिले में अभी तक औसत से 33 फीसदी से भी कम पानी बरसा है।
झांसी जिले की औसत वर्षा 879.10 मिलीमीटर है। बरसात के तीन महीने निकल गए, लेकिन अभी तक सिर्फ 283 मिलीमीटर पानी बरसा है, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बरसात की कितनी खराब स्थिति है। 2013-14 में अगस्त में अधिकतम 482.30 मिलीमीटर बरसात और 2003-04 में सितंबर में अधिकतम 583.80 मिलीमीटर बरसात हुई थी, जो अब तक का रिकार्ड है। अकेले चित्रकूट जिले को छोड़ दिया जाए तो बुंदेलखंड के बाकी छह जिले बरसात में पानी के लिए तरस रहे हैं। बुंदेलखंड की त्रासदी है कि हर तीसरे साल यहां पर सूखा पड़ता है। अबकी बार भी ऐसी ही स्थितियां हैं। उप्र के कई जिले बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, तो बुंदेलखंड के जिले पानी के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने एक बार फिर मुसीबत आने वाली है।
किसानों ने कर्ज लेकर जैसे-तैसे बुवाई तो कर दी, लेकिन अब पैदावार न होने से किसान फिर से दोराहे पर आकर खड़ा हो गया है। खरीफ फसलों में जिले के किसानों ने 77,350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तिल और 86,210 हेक्टेयर में उर्द की बुवाई की थी। अभी तक तिल की स्थिति तो ठीक है, लेकिन उड़द में या तो कीड़ा लग गया है या फिर फसल सूख गई है। फसल में दाना नहीं आया है। सूखे के हालात देखते हुए कृषि विभाग ने खेतों का सर्वे कराने का निर्णय लिया। सभी एसडीएम को गांव-गांव में लेखपालों के माध्यम से सर्वे कराने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि पता लगाया जा सके कि किस गांव में खेती की क्या स्थिति है?
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बुंदेलखंड में बरसा पानी
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जिला बारिश
झांसी 283 मिलीमीटर
जालौन 203 मिलीमीटर
बांदा 426 मिलीमीटर
हमीरपुर 226 मिलीमीटर
ललितपुर 215 मिलीमीटर
चित्रकूट 742 मिलीमीटर
महोबा 292 मिलीमीटर
बारिश नहीं हुई तो मुसीबत
दस दिन के अंदर यदि अच्छा पानी बरस जाता है तो ठीक, अन्यथा की सूखे के हालात नजर आ रहे हैं। इसे देखते हुए सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे में वास्तविकता सामने आ जाएगी।
- दुर्गेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।