केंद्र सरकार ने बजट में आंगनबाड़ी केंद्रों में महिला शक्ति केंद्रों की स्थापना की घोषणा करके अतिरिक्त कामों में वृद्धि तो कर दी है, जबकि मानदेय बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की। सरकार की अन्य मानदेय सेवाओं को भी खत्म करने की मंशा को देखकर आंगनबाड़ी यूनियन आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से संगठित कार्यक्रम करेगी। एक मई को जिला स्तरीय प्रदर्शन होंगे। बुधवार को यह बात आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की प्रदेश महामंत्री डॉ. वीना गुप्ता ने पत्रकारों से कही।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इंटीग्रेटिड चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को इस बार आधा बजट भी नहीं दिया है। जबकि 12 वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 2017-18 में बच्चों के लिए तीस हजार से अधिक का बजट देना था, जो बजट मिला है, उससे देश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों के हिस्सों में ढाई-ढाई सौ रुपये ही हाथ आएंगे। ऐसे में कर्मचारी बच्चों की देखरेख कैसे कर सकेंगी। प्रदेश सरकार ने भी आठ सौ रुपये मानदेय लागू न करके धोखा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को अपना वायदा निभाकर केंद्र के बराबर अपना अंशदान मानदेय देना चाहिए। कार्यकत्री और सहायिका को राज्य कर्मचारी का दर्जा मिले तथा सातवें वेतन आयोग की संस्तुति के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी 18 हजार रुपये मिलनी चाहिए। इस मौके पर झांसी जिलाध्यक्ष लक्ष्मी देवी गोस्वामी, ललितपुर जिलाध्यक्ष प्रतिभा कौशिक, जेएन पाठक, हरिमोहन शर्मा, हाकिम सिंह यादव मौजूद थे।