खुले में शौच से मुक्ति के लिए चल रहे अभियान में शामिल टीम के सदस्यों को सीडीओ नवनीत सिंह चहल ने ग्रामीणों को बुंदेली भाषा में समझाने के लिए कहा है। शनिवार को अमर उजाला में बुंदेली हेडिंग के साथ छपी खबर के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को समझाने के लिए मातृ भाषा सबसे अच्छा माध्यम है।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बड़ागांव ब्लाक को 45 गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए चलने वाले जागरूकता अभियान की खबर शनिवार को अमर उजाला ने ‘जीके हाथ दिखे लोटा, ओई खों लगेगो टोका’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था। इसका असर शनिवार को ही दिन कार्यशाला में दिखा। मुख्य विकास अधिकारी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता प्रतिभागी वार्तालाप स्थानीय भाषा में करें, ताकि जो जानकारी ग्रामीणों को दी जाए, वह उन्हें आसानी से समझ में आ जाए। खुले में शौच मुक्त करने के लिए यदि उनके कोई सुझाव हों तो उनका भी क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को खुले में शौच से होने वाले नुकसान की जानकारी उनकी भाषा में देंगे तो सहज ही उन्हें यह कार्य घृणित लगेगा।
शनिवार को बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिक संस्थान में चल रही कार्यशाला में सीडीओ ने महिला प्रभारियों को सुझाव दिया कि महिलाओं से उनकी भाषा में ही बात करें, ताकि उन्हें सहजता से समझ में आ जाए। यदि खुले में शौच के नुकसान की जानकारी परिवार की महिलाओं को होगी तो निसंदेह सफलता जल्द प्राप्त होगी।
विश्व बैंक के विषय विशेषज्ञ नोडल अधिकारी विनोद शर्मा ने कहा कि स्वच्छता प्रतिभागी ही स्वच्छता दूत की जिम्मेदारी निभाएंगे। इन्हें 12 समूहों में बांट कर प्रत्येक समूह का एक लीडर बनाया जाएगा। सभी स्वच्छता दल छह नवंबर को सुबह मुस्तरा, टांकोरी, परीछा, चेलरा और अन्य गांवों में जाएंगे। स्वच्छता प्रतिभागियों के समूह के साथ मुख्य विकास अधिकारी भी रहेंगे तथा की जाने वाली कार्रवाई की मानीटरिंग करेंगे और सुझाव भी देंगे। इस मौके पर डीपीआरओ राजीव शर्मा, कोआर्डिनेटर मनोज श्रीवास्तव, राजीव हिंगवासिया उपस्थित रहे।