झांसी। हर साल 60 से ज्यादा बच्चों की आंख की रोशनी पेन, पेंसिल, पिन, कंपास जैसी नुकीली चीजें से होने वाली चोट से चली जाती है। इनमें कई बच्चे तो ऐसे होते हैं, जिन्हें परिजन समय से अस्पताल नहीं लेकर जाते। आंखों में संक्रमण हो जाने से कई बच्चों की आंख तक निकालनी पड़ जाती है।
आंखों में चोट लगने के बाद घाव को भरने के लिए माइक्रोस्कोप में देखकर नेत्र रोग विशेषज्ञों को सर्जरी करनी पड़ती है। डॉक्टरों के मुताबिक आंख की चोट में बाल से भी दस गुना पतला टांका लगाया जाता है। दस साल तक के बच्चों की आंख नुकीली चीज से आंख चोटिल होने के मेडिकल कॉलेज में हर महीने 70 से 75 केस आते हैं। बताया गया कि इनमें 30 फीसदी बच्चों का ऑपरेशन करना पड़ता है। तीन से चार बच्चों की आंख की रोशनी वापस नहीं लौट पाती। वहीं, साल भर में आठ से 10 बच्चे इतने बिगड़ी स्थिति में आते हैं, जिनकी आंख में चोट पहुंचने के बाद इलाज न कराने पर संक्रमण हो जाता है। अगर संक्रमण दिमाग में पहुंच जाते तो जान जाने का खतरा रहता है। ऐसे में फिर आंख निकालनी पड़ती है। उसके बाद प्लास्टिक की नकली आंख लगा देते हैं। वहीं, जिला अस्पताल में भी बच्चों की आंख की रोशनी जाने के हर साल 20 से ज्यादा के पहुंचते हैं। निजी अस्पतालों में भी ऐसे केस आते रहते हैं।
केस-1
मां के कपड़े में लगे हुक से गई मासूम के आंख की रोशनी
पांच महीने के मासूम की आंख का कॉर्निया मां के कपड़े में लगे हुक से रगड़ गया। इससे उसकी आंख में संक्रमण हो गया। इससे आंख से पस आने लगा। पांच-छह दिनों बाद जब परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे तो जांच के बाद उन्होंने बताया कि उसकी आंख की रोशनी चली गई है।
केस-2
खेलते-खेलते छोटे भाई की आंख में मार दिया पेन
खेलते-खेलते नौ साल के बच्चे ने सात वर्षीय छोटे भाई की दायीं आंख में पेन मार दिया। पेन ने कॉर्निया को फाड़ते हुए आंख के पर्दे को गंभीर रूप से चोट पहुंचा दी। मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन किए जाने के बाद भी बच्चे की आंख की रोशनी नहीं लौट पाई।
केस-3
बच्ची की आंख में कंपास लगने से उखड़ गया पर्दा
सात साल की बच्ची ने खुद ही अपनी आंख में कंपास मार लिया। इससे आंख का पर्दा अपनी जगह से निकल गया। परिजन उसे लेकर नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे। जहां उसकी आंख की सर्जरी की गई। इसके बाद भी बहुत कम रोशनी आ पाई।
मेडिकल कॉलेज में हर साल करीब 40 बच्चे ऐसे आते हैं, जिन्हें पेन, पेंसिल, कंपास आदि नुकीली चीज से चोट लगने से आंख की रोशनी चली जाती है। आठ से दस केस इतनी खराब स्थिति में आते हैं, जिन बच्चों की आंख निकालनी पड़ती है। इसलिए बच्चों पर विशेष ध्यान दें। - डॉ. जितेंद्र कुमार, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
आंख में सामान्यता तीन लेयर होती है। सबसे आगे कंजेक्टिवा होती है। अगर नुकीली चीज से ये फट जाए तो ज्यादा नुकसान नहीं होता है। इसके पीछे स्थित स्क्लेरा या फिर पर्दा फट जाए, तो रोशनी जा सकती है। साल में चार-पांच ऐसे बच्चे आते हैं, जिनकी नुकीली चीज से आंख की रोशनी चली जाती है। - डॉ. शमी, नेत्र रोग विशेषज्ञ।
अगर कॉर्निया में रगड़ लगती है तो समय पर इलाज न होने से संक्रमण हो जाता है। बाद में आंख की रोशनी जा सकती है। नुकीली चीज से रोशनी जाने के अस्पताल में सालाना लगभग 20 केस आते हैं। परिजनों को बच्चे की आंख में चोट लगने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। - डॉ. विनोद यादव, नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल।