अब मंडल में रात में गुजरने वालीं सभी ट्रेनों में जीआरपी और आरपीएफ स्क्वॉयड भेजा जा रहा है। कुछ ट्रेनों में जीआरपी, तो कुछ में आरपीएफ का स्क्वॉयड चल रहा है। स्क्वॉयड की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित कर लें कि ट्रेन के सभी दरवाजे बंद हैं कि नहीं। किसी स्थान पर कोई संदिग्ध व्यक्ति या समूह दिखाई तो इसकी तुरंत सूचना कंट्रोल रूम को देना है। चालक, कोच कंडक्टर व गार्ड का नंबर रखना भी जरूरी है।
एक्सपर्ट की मदद
पुष्पक एक्सप्रेस और पटना इंदौर एक्सप्रेस के लुटेरों को पकड़ने के लिए आरपीएफ और जीआरपी के अफसर, थानेदार से लेकर सिपाही तक जांच में जुटे हैं, लेकिन नतीजा शून्य है। अभी तक ढाई सौ से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है। इनमें पुराने हिस्ट्रीशीटर, अवैध वेंडर, गदाई व घटनास्थल के आसपास क्षेत्रों के बदमाश शामिल हैं। झांसी से कानपुर तक के ऐसे अपराधियों का पता किया गया, जो रेल अपराधों से जुड़े रहे हैं। एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। रात में सादा कपड़ों में पुलिस सभी रेलवे आउटर पर गश्त कर रही है। मगर लुटेरों को पकड़ने में सफलता हासिल नहीं लग सकी है।
प्रतिदिन डायरी की जांच
पुष्पक एक्सप्रेस और पटना इंदौर एक्सप्रेस में लूटपाट की घटनाओं का खुलासा तो दो सप्ताह बाद भी नहीं हो सका है। लेकिन ट्रेनों में अब जीआरपी और आरपीएफ स्क्वॉयड कर्मी ड्यूटी के दौरान जरूर बेहद सतर्कता बरत रहे हैं। ट्रेन जहां भी रुकती है उसका ब्यौरा कारण समेत डायरी में दर्ज किया जा रहा है। खासकर गाड़ी के छोटे स्टेशन या सिग्नल पर रुकने पर, ऐसी जगहों पर घटना होने की संभावना अधिक रहती है। ट्रेन स्क्वॉयड लौटने पर संबंधित थाना प्रभारी प्रतिदिन डायरी की जांच करते हैं।