अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ट्रैफिक को सुरक्षित बनाने के लाख दावों के बावजूद सड़क हादसों में कोई कमी नहीं आ रही है। हालिया आंकड़ों की मानें तो पिछले साल के मुकाबले सड़क हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या में 32 फीसदी का इजाफा हुआ है वहीं, पिछले तीन साल के आंकड़े बताते हैं कि सर्वाधिक हादसे का शिकार दो पहिया वाहन चालक हो रहे हैं। हादसों के शिकार हर तीसरे व्यक्ति की मौत सीधे सिर में चोट लगने की वजह से हुई। इन चालकों ने हेलमेट नहीं लगाए थे। इस वजह से इनको अस्पताल तक पहुंचने का भी समय नहीं मिल सका।
यूपी-एमपी बार्डर होने की वजह से झांसी के चारों ओर राजमार्गों का जाल बिछा हुआ है। चौड़ी सड़कें होने से वाहनों की रफ्तार भी तेज रहती है। तकरीबन रोजाना ही तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर दो पहिया वाहन सवार जान गवां बैठते हैं। पिछले तीन साल के दौरान 613 से अधिक लोग सड़क हादसों में जान गवां चुके। इनमें 227 लोगों की मौत सिर में चोट लगने से हुई। चिकित्सकों का भी कहना है कि सिर में चोट लगने से जान जाने का सर्वाधिक खतरा रहता है।
केस एक
11 जुलाई को झांसी-कानपुर हाइवे पर पूंछ कस्बे के पास मोटर साइकिल सवार मुकेश को अज्ञात तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में मुकेश के सिर में गहरी चोट आई थी। इस चोट की वजह से उसकी हालत बिगड़ती गई। आखिरकार उसकी मौत हो गई।
केस दो
एक अगस्त को मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के सामने मोटर साइकिल भिड़ंत होने से ह़देश श्रीवास्तव की मौत हो गई। उनके भी सिर में गहरी चोट आई थी। इस वजह से मौके पर ही हदेश ने दम तोड़ दिया।
केस तीन
7 जुलाई को रक्सा के सिजवाहा तिराहा के पास बाइक सवार सोनू पाल को बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया। हादसे में सोनू के सिर में गहरी चोट आ गई थी। इस वजह से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट लगाने के लिए जागरूक किया जाता है। हेलमेट न लगाने वाले वाहन चालकों का चालान भी किया जाता है।
रामवीर सिंह, सीओ ट्रैफिक