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बीस साल बाद भी न कॉलेज, न अस्पताल...फिर कहां हुआ विकास

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झांसी। बीस साल पहले नगर निगम में शामिल हुए हंसारी, बिजौली, राजगढ़, बल्लभगढ़ जैसे इलाकों तक अभी बुनियादी सहूलियतें नहीं पहुंची। इस पूरे इलाके में न कोई इंटर कॉलेज है, न कोई अस्पताल। पूरे इलाके में महिलाओं का एक भी अस्पताल नहीं है। बीमार महिलाओं को गंभीर हालत में इलाज के लिए पंद्रह किमी दूर शहर जाना पड़ता है।
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वर्ष 2002 में उत्तर दिशा की ओर नगर निगम सीमा हंसारी, श्रीनगर, राजगढ़, बल्लमपुर, कोडरन, बिसातीपुरा, सिमराहीपुरा, पिकुरवा से बिजौली तक पहुंच गई। यहां करीब 40-50 हजार आबादी रहती है। शहरी सीमा में जुड़ने के बाद से यहां की व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी लेकिन, सरकारी सहूलियत में इजाफा नहीं हुआ।
स्थानीय लोग बताते हैं पीने का पानी न मिलना यहां की सबसे बड़ी समस्या है। राजगढ़, बल्लमपुर, बैकुंठपुरी, बजरंग मोहल्ला, हरिनगर, क्रेशर मोहल्ला जैसे दर्जनों इलाकों में पानी के लिए सिर्फ हैंडपंप सहारा है। शहरी सीमा में शामिल होने के बावजूद यहां पाइप लाइन नहीं पहुंची। गर्मियों में जलस्तर नीचे चला जाता है। चार महीने तक हैंडपंप शोपीस बन जाते हैं। टैंकर से किसी तरह पानी पहुंचाया जाता है।
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लड़के एवं लड़कियों की शिक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। बिजौली एवं राजगढ़ में प्राथमिक विद्यालय है लेकिन, इंटर कॉलेज कोई नहीं है। लड़के एवं लड़कियों को हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए पांच किमी दूर शहर जाना पड़ता है। उच्च शिक्षा का भी कोई संस्थान नहीं है हालांकि बिजौली में डिग्री कॉलेज पिछले साल से अवश्य बनना आरंभ हुआ है।
साफ-सफाई न होने से भी यहां लोग परेशान हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान शहर में शुरू हो चुका लेकिन, इस इलाके में अभी सीटी बजनी शुरू नहीं हुई। नालियों की सफाई नहीं होती। कई इलाकों में नालियां पूरी तरह सिल्टेड हो चुकी हैं। सफाई के लिए प्राइवेट सफाईकर्मियों की मदद लेनी पड़ती है। मोहल्ले के बाहर कूड़ा भी कई दिनों तक जमा रहता है।
भीतरी इलाकों में सड़कों की दशा भी अच्छी नहीं है। अंदर के हिस्सों में रास्ता कच्चा है। यहां एपेक्स तक नहीं बिछा। लोगों का कहना है बारिश के दिनों में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। घंटों बिजली नहीं आती। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। उनका कहना है कि बिल शहरी दरों के मुताबिक लिया जाता है लेकिन, आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है श्रीनगर, बल्लमपुर जैसे इलाकों में खंबे भी नहीं लगे। जुगाड़ के रास्ते मोहल्लों के भीतर बिजली पहुंचाई गई है।
- शहरी इलाका होने के बावजूद खंबे नहीं दिए जाते। सड़क से मोहल्ले तक बल्लियों के सहारे तार लगाए गए हैं। कई लोग डीपी न होने की वजह से कनेक्शन तक नहीं ले पाते हैं।
नीरजा शर्मा, बैकुंठपुरी
- बच्चों की पढ़ाई के लिए इस इलाके में भी शिक्षण संस्थान खोले जाने चाहिए लेकिन, इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। बड़ी संख्या में बच्चे इस वजह से परेशान होते हैं।
कमलेश कुमार
पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है। शहरी सीमा में शामिल किए जाने के बाद यहां भी सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए
मुस्कान
शहर में कूड़ा घरों से उठवाया जा रहा है लेकिन, यहां अभी तक व्यवस्था शुरू नहीं हुई। सफाई के लिए नियमित कर्मचारी भी नहीं लगाए गए।
राज राय
पीने का पानी न मिलने से सबसे ज्यादा लोग परेशान हैं। सिर्फ हैंडपंप ही यहां का सहारा है। पाइप लाइन आज तक इस इलाके मेें नहीं पहुंची।
रामप्रसाद
अस्पताल के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इस पूरे इलाके में प्राइवेट अस्पताल भी नहीं हैं। महिलाओं के लिए उपचार की व्यवस्था नहीं है।
आर्दश सिंह
पीने का पानी नहीं मिलता। काफी समस्या होती है। हैंडपंप के खराब हो जाने से पानी नहीं मिलता। टैंकर का ही सिर्फ सहारा रहता है।
पुष्पा सिंह,
बिजौली में बन रही टंकी का निर्माण ठप
बिजौली में दो साल पहले अटल जल परियोजना के जरिए टंकी का निर्माण शुरू कराया गया। इससे आसपास के इलाकों में पेयजल समस्या खत्म होने की उम्मीद बंधी लेकिन, इसका निर्माण पिछले छह माह से ठप पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है टंकी का निर्माण पूरा होने की समय सीमा खत्म हो चुकी। पार्षद गायत्री आर्दश गुप्ता के मुताबिक जल संस्थान एवं नगर निगम के अधिकारियों से टंकी का निर्माण जल्द पूरा कराने की कई बार मांग की गई लेकिन, भुगतान न करने की वजह से ठेकेदार कार्य आरंभ करने को राजी नहीं हो रहा है। टंकी का निर्माण अधूरा होने से लोग परेशान हैं।
करीब छह किमी दूर प्रेमनगर थाना
नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद आबादी हर साल बढ़ रही है लेकिन, उसके बावजूद इन इलाकों के लिए कोई नया थाना नहीं बनाया गया। बीस साल पहले की व्यवस्था के मुताबिक यह सब इलाके अभी भी प्रेमनगर थाने से ही जुड़े हैं। ऐसे में इन इलाकों में सुरक्षा के साथ ही कानून-व्यवस्था भी बनाए रखना पुलिस के लिए खासी चुनौती होेती है। राजगढ़ जैसे इलाकों में वारदात होने पर प्रेमनगर से पुलिस बल को पहुंचने में करीब एक घंटे से भी ज्यादा का वक्त लगता है। यहां थाना खोलने का प्रस्ताव भी करीब दस वर्ष पहले शासन को भेजा गया लेकिन, इसको मंजूरी नहीं मिली।
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