संवाद न्यूज एजेंसी
समथर। समथर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में उच्चीकृत करने की कवायद सात साल पहले शुरू की गई थी। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन का निर्माण भी किया गया था और उस पर बोर्ड भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लगा दिया गया था। लेकिन, स्वास्थ्य सेवाएं अब तक उच्चीकृत नहीं हो पाईं हैं। क्षेत्र के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं ही यहां मिल रहीं हैं। जबकि, समथर कस्बे के अलावा आस-पास के कई गांवों के लोग इलाज के लिए इसी केंद्र पर निर्भर हैं।
साल 2014-15 में समथर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर शासन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद नए भवन का निर्माण शुरू कर दिया गया था। साल 2017 में पांच करोड़ रुपये की लागत से नया भवन बनाया गया था, जिसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित भी कर दिया गया था। नए भवन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड भी लगा दिया गया था। क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को उच्चीकृत करने की कोशिश बस यहीं तक सीमित रह गईं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार न तो चिकित्सकों की तैनाती की गई और न ही कर्मचारियों के पद स्वीकृत किए गए। जबकि, यहां रोजाना औसतन 150-200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, लैब टेक्नीशियन न होने की वजह से उनकी सामान्य जांचें तक नहीं हो पाती हैं। इसके लिए उन्हें निजी पैथोलॉजी जाना पड़ जाता है। इतना ही नहीं, यहां सालों से महिला चिकित्सक की भी तैनाती नहीं है, जिससे महिलाओं को इलाज के लिए जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ जाता है। प्रभारी चिकित्साधिकारी के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जा रहा है।
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अस्पताल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुरूप अभी तक पद सृजित नहीं हुए हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर लैब टेक्नीशियन का पद वर्तमान में रिक्त चल रहा है। इसके लिए विभाग से पत्राचार किया गया है। - डॉ संगुल तिवारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी
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नगर के स्वास्थ्य केंद्र पर शीघ्र ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाएं दिया जाना जनहित में आवश्यक है, क्योंकि इस पर बड़ी आबादी निर्भर है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए शासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - महेश पेंटर, पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका
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अस्पताल में महिला चिकित्सक न होने की वजह से महिलाओं को इलाज के लिए झांसी या अन्य जगह ले जाना पड़ता है। इससे परेशानी तो होती ही है, साथ ही लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। अस्पताल में महिला चिकित्सक की तैनाती की जानी चाहिए। - राजकिशोर चचोंदिया
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नगर के अस्पताल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड तो लगा हुआ है, लेकिन इसके अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए। - अश्वनी उपाध्याय
एरच में एक साल से ठप है प्रसव की सुविधा
एरच। स्वास्थ्य केंद्र में पिछले एक साल से प्रसव की सुविधा ठप बनी हुई है, जिससे गर्भवतियों को प्रसव के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ जाता है या उन्हें 15-20 किलोमीटर दूर मोंठ व बामौर के सीएचसी पर ले जाना पड़ता है। एक साल पहले एएनएम के सेवानिवृत्त होने के बाद से अब तक यहां नई तैनाती नहीं की गई है, जिसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र में रहने वाली पूर्व सभासद मालती पांचाल, सभासद लखन रत्नाकर, अमित कुमार बुधौलिया, रोहन कुमार, चंद्रकांत पाठक, अमित कुमार सचान, जगदीश सचान दीपक रत्नाकर आदि ने अस्पताल में प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, सीएचसी बामौर के अधीक्षक डा. विमल कुमार ने बताया कि एरच स्वास्थ्य केंद्र प्रसव सुविधा शुरू करने के लिए यहां नियुक्त की गई एएनएम को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पंद्रह दिन बाद इस सेवा का लाभ यहां गर्भवतियों को मिलने लगेगा। संवाद