झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे अभियांत्रिकी तथा प्रौद्योगिकी संस्थान में कार्यरत शिक्षकों को कॉलेब्रेटिव रिसर्च स्कीम (सीआरएस) टेक्निकल एजूकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टेक्युप-3) के तहत विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित छह शोध परियोजनाओं की स्वीकृति मिली है। प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार की ओर से 89 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी प्रो. शिवकुमार कटियार ने जानकारी दी कि नेशनल प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट-मानव संसाधन विकास मंत्रालय (भारत सरकार) ने देशभर में कार्यरत टीक्यूप परियोजना अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों से परियोजना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। प्रथम चरण में अभियांत्रिकी संस्थान में कार्यरत शिक्षकों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों में से छह की स्वीकृति मिल चुकी है। इन छह परियोजनाओं के लिए 88.95 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने बताया कि खाद्य तकनीकी इंजीनियरिंग विभाग में तीन परियोजनाएं इंजी. अंजली श्रीवास्तव, इंजी. सदफ नजीर तथा इंजी. जुनैद के नाम से स्वीकृत की गई हैं। जबकि, बायो टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग की पल्लवी पुष्प, मेकेनिकल इंजीनियरिंग के इंजी. पवन सिंगोटिया तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के इंजी. अभय उपाध्याय को एक-एक परियोजनाएं अनुमोदित हुई हैं। सभी परियोजनाओं में सर्वाधिक उन्नीस लाख बयालीस हजार रुपये की धनराशि खाद्य तकनीकी इंजीनियरिंग विभाग के लिए स्वीकृत हुई है। यह परियोजनाओं सत्र 2019-20 के लिए हैं। सभी को अपने प्रोजेक्ट मार्च 2020 तक पूरा करना है।