पारीछा थर्मल प्लांट में सौर ऊर्जा से बनेगी बिजली
झांसी। बिजली बनाने की यूनिटों के पुराने होने और उत्पादन कम होते देख प्रदेश सरकार ने पावर प्लांटों को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। एक-एक कर पुरानी इकाइयों को बंद किया जाएगा। वहां सौर ऊर्जा से बिजली बनाई जाएगी। इस योजना में पारीछा थर्मल पावर प्लांट भी शामिल हो गया है। यहां भी सौर ऊर्जा से बिजली बनाई जाएगी। पारीछा प्लांट में करीब आठ सौ मेगावाट बिजली बनाने के लिए सोलर उपकरण लगाए जाएंगे।
केंद्र सरकार ने देश भर में सोलर प्लांट लगाकर 1.75 लाख मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य तैयार किया है। उत्तर प्रदेश में अभी 20,250 मेगावाट बिजली की मांग चल रही है। इसमें प्रदेश सरकार के पारीछा, ओबरा, पनकी, हरदुआ गंज और अनपरा पावर प्लांट से चार से साढ़े चार हजार मेगावाट बिजली बन पा रही है। बाकी बिजली प्राइवेट कंपनियों और एनटीपीसी से खरीदी जा रही है। प्राइवेट कंपनियों ने 600 मेगावाट से अधिक की यूनिटें लगा रखी हैं, जिससे बिजली की एक साथ बड़ी मांग उपलब्ध हो जाती है। नई मशीनें होने से उत्पादन भी सस्ता पड़ रहा है।
यही कारण है कि पावर सेक्टर ने मांग कम बताकर अपनी पुरानी इकाइयों को बंद करने की तैयारी कर शुरू कर दी है। बताया गया है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है। पुरानी इकाइयों की बिजली प्राइवेट कंपनियों से भी महंगी पड़ रही है। पुरानी उत्पादन इकाइयां आए दिन खराब हो जाती हैं। उनकी मरम्मत में बड़ी रकम खर्च होती है और इस दौरान उन्हें बंद करना पड़ता है। इसमें पारीछा थर्मल पावर प्लांट भी शामिल है। अभी पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो और 250 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। इनमें 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई जुलाई 2016 से बंद है। भविष्य में प्लांट की और भी इकाइयां बंद हो सकती हैं। सरकार अब इसकी जगह सोलर प्लांट लगाने की तैयारी में है।
हां, यह बात सही है कि सरकार सोलर प्लांट से बिजली बनाने को प्राथमिकता दे रही है। पारीछा में भी सोलर प्लांट लगाने की योजना है। फिलहाल, प्लांट में जो इकाइयां चल रही हैं उनकी बिजली दरों के लिए 2024 तक का अनुबंध हो गया है।
- ज्ञान प्रकाश वर्मा, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट।
ये भी कारण
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- पुरानी मशीनों का रखरखाव बढ़ा।
- एश (राख) रखने के लिए नए बांध नहीं।
- मशीनों से पूर्ण क्षमता के साथ नहीं हो पाता उत्पादन।
- रांची, धनबाद से कोयला मंगाना पड़ रहा महंगा।
- पर्यावरण के नियमों का पालन करना भी होता है मुश्किल।
90 लाख की पड़ती है एक रैक
पारीछा थर्मल पावर प्लांट की सभी इकाइयों को चलाने के लिए प्रतिदिन चार से पांच मालगाड़ी (रैक) कोयले की आवश्यकता है। एक रैक में 3600 टन कोयला आता है, जो लगभग 90 लाख का पड़ता है। हर महीने पांच से छह लाख टन राख निकलती है, जिसमें अभी एक लाख टन की कंपनी और फैक्ट्री संचालक अपने उपयोग के लिए ले जा रहे हैं।
यह भी जानिए
प्रदेश में संचालित सभी इकाइयों की क्षमता लगभग सात हजार मेगावाट की है, जिसमें अभी चार से साढ़े चार हजार बिजली का उत्पादन हो रहा है। जबकि, मांग 20 हजार से अधिक मेगावाट की है। बाकी बिजली केंद्र से खरीदनी पड़ती है। हालांकि, इस मामले में ट्रांसमिशन अफसरों का कहना है कि कम क्षमता की इकाइयों को बंद करने से कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यहां के ग्रिड तंत्र के हिसाब से ललितपुर के बजाज पावर प्लांट ने इस कमी को पूरा कर दिया है।