बिजली बिल की खामियों को दुरुस्त करने में कितना वक्त लग सकता है? इस सवाल का जवाब आप कुछ भी दे सकते हैं। लेकिन, यही सवाल सदर बाजार के एक विकलांग दुकानदार से पूछा जाए तो उसका जवाब होगा- ताउम्र।
दरअसल, विभाग द्वारा भेजे गए गलत बिल को दुरुस्त कराने के लिए यह विकलांग पिछले बारह वर्षों से अफसरों से लेकर मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री तक गुहार लगा चुका है, लेकिन अब तक उसकी मदद को किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया है। सब्र ने जवाब दिया तो पहले उसने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई और अब मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
सदर बाजार निवासी 61 वर्षीय विकलांग अशोक कुमार जैन की फ्रेंडस कांपलेक्स के अंदर घड़ी की दुकान है। वर्ष 1997 में उसने अपनी दुकान में विद्युत संयोजन संख्या 813/079133 लिया था। तीन साल तक वह नियमित बिल जमा करता रहा। इसके बाद गलत रीडिंग के साथ बिल आना शुरू हुआ तो उसने विभाग में बिल ठीक करने के लिए अर्जी दे दी।
आश्वासन मिलने पर 21 फरवरी 2002 को उसने आठ हजार रुपये तो जमा कर दिए, लेकिन बिल ठीक नहीं हुआ। यहीं से उसके बुरे दिन शुरू हो गए। तब से लेकर आज तक वह विभाग के बाबुओं से लेकर अफसरों तक के चक्कर लगा चुका है, लेकिन बिल नहीं सुधरा। यही नहीं, सितंबर 2010 में विभाग ने उसे 1,29,000 का बकायेदार बताते हुए संयोजन भी काट दिया।
इसके तुरंत बाद पीड़ित ने केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य को अपनी दास्तान सुनाई तो उन्होंने विकलांग की मदद के लिए दो-दो बार मुख्य अभियंता को पत्र लिखा, लेकिन अफसरों के कानों पर जू तक नहीं रेंगी। यहां से मिली निराशा के बाद वह विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता, प्रबंध निदेशक आगरा, विद्युत हेल्प लाइन लखनऊ, सदर विधायक, प्रदेश के ऊर्जा मंत्री व मुख्यमंत्री तक को प्रार्थना पत्र देकर बिल दुरुस्त कराने की गुहार लगा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, यानी बिल ठीक नहीं हुआ। इतना ही नहीं 12 दिसंबर 2012 को विभागीय अधिकारी दुकान में लगे मीटर तक उखाड़ ले गए।
बिजली नहीं आने के कारण कांपलेक्स के अंदर उसकी दुकान में अंधेरा पसरा रहता है। इस वजह से दुकान में ग्राहकों का आना बंद हो गया है। इसके बाद भी पीड़ित ने अपना हक पाने का हौसला नहीं छोड़ा है। मुआवजे के लिए उसने उपभोक्ता फोरम में बिजली विभाग पर 9,28,500 रुपये का क्लेम ठोका है। वहीं, उसने मानवाधिकार आयोग का भी दरवाजा खटखटाया है। इस प्रकरण पर विद्युत अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
किसने और किसको, क्या दिये आदेश
उपभोक्ता के साथ अन्याय किया जा रहा है। साथ ही नियामक आयोग विद्युत लोकपाल एवं व्यथा निवारण फोरम का भी अपमान किया जा रहा है। अधिशासी अभियंता मोर मुकुट सात दिन के अंदर मामला निस्तारण करें।
- जगमाल सिंह, अधीक्षण अभियंता, 19 मई 2007
उपभोक्ता 61 वर्ष का विकलांग व्यक्ति है। अधिशासी अभियंता वितरण खंड (एक) कृपया इनसे कार्यालय के चक्कर न लगवाएं एवं इनका कार्य मानवता के आधार पर अतिशीघ्र करें।
- नंद गोपाल, मुख्य अभियंता, 11 अक्तूबर 2010
उपभोक्ता का अक्तूबर 2000 से अक्तूबर 2010 तक लेखा चेक कराकर अधिशासी अभियंता प्रथम नियमानुसार बिल प्रस्तुत करें।
- ए सी अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, 26 अक्तूबर 2010