झांसी। महानगर की घनी आबादी के बीचोंबीच उनाव गेट मुक्तिधाम परिसर में बनाया गया बुंदेलखंड का पहला विद्युत शवदाह तय मियाद पूरी होने के तीन साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। रखरखाव न होने की वजह से ये कंडम हो चला है। जबकि, कोरोना काल में संक्रमितों के दाह संस्कार में ये बेहद उपयोगी साबित होता।
लकड़ी की बचत और प्रदूषण नियंत्रण के लिए साल 2016 में उनाव गेट मुक्तिधाम में विद्युत शवदाह गृह का निर्माण शुरू किया गया था, जिसे 2018 में शुरू किया जाना था। इस पर 75 लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई थी। इस रकम से भवन का निर्माण किया गया था तथा धुआं निकालने के लिए चिमनी व अन्य मशीनें लगाई गई थीं। लेकिन काम पूरा होने से पहले ही ठप पड़ गया। कई नोटिस जारी किए जाने के बाद भी निर्माण करने वाली कंपनी काम करने से बचती रही। अंतत: कंपनी को नगर निगम ने ब्लैक लिस्टेड कर लिया और अब नए सिरे से टेंडर जारी किए जा रहे हैं। लेकिन नियमित रखरखाव न होने की वजह से विद्युत शवदाह गृह अब कंडम हो चला है। बाहर लगी लोहे की भारी भरकम चिमनी पर जंग की चपेट में आ गई है। जबकि, भवन के अंदर का पूरा फर्श उखड़ गया है। खिड़की - दरवाजे भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। शवदाह गृह की ये स्थिति देखकर वहां पहुंचने वाले लोगों को खासी निराशा होती है।
विदित हो कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से झांसी में 174 लोग जान गवां चुके हैं। शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को खासी मशक्कत करनी पड़ जाती है। ऐसे में यदि विद्युत शवदाह गृह चालू होता तो संक्रमितों के शवों का अंतिम संस्कार बेहद आसान होता।
शवदाह गृह में कुछ मशीनें लगी हैं, कुछ लगना बाकी हैं। काम पूरा करने के लिए नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। जल्द ही इसका निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। जबकि, पुरानी कंपनी को काली सूची में डाल दिया गया है। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर