झांसी। इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र की नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन शनिवार को दो प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल किए। इसके साथ ही इस सीट से अब तक तीन दावेदार सामने आ चुके हैं। नामांकन पत्र 12 जनवरी तक भरे जाएंगे।
इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र में 10 जनपद प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, झांसी, जालौन व ललितपुर आते हैं। बृहस्पतिवार से इसकी नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत झांसी कमिश्नरी में हुई थी। पहले दिन नौ दावेदारों ने नाम निर्देशन पत्र प्राप्त किए थे। जबकि, दूसरे दिन शुक्रवार को निर्दलीय प्रत्याशी लालमणि द्विवेदी ने पर्चा दाखिल किया था।
वहीं, शनिवार को दो प्रत्याशियों ने नामांकन किया। वर्तमान एमएलसी व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रयागराज के अल्लापुर निवासी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। वह नामांकन पत्र दाखिल करने अपने समर्थकों के जुलूस के साथ पहुंचे थे। जबकि, दूसरा नामांकन शिक्षक संघ के चेतनारायण गुट के प्रत्याशी हमीरपुर के मोहदा निवासी जगदीश प्रसाद व्यास ने दाखिल किया। वह भी अपने समर्थकों व शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के साथ पर्चा भरने पहुंचे। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में प्रत्याशी व उनके प्रस्तावकों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।
उधर, निर्धारित समय दोपहर तीन बजे नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक कमिश्नरी के बाहर सड़क का यातायात पूरी तरह से प्रतिबंधित रहा। इक्का-दुक्का लोग पैदल ही वहां से गुजरते नजर आए।
मतदाता सूची की चौथे दिन भी जारी रही जांच
झांसी। शिक्षक एमएलसी चुनाव की पूर्व में जारी की गई मतदाता सूची में क्षेत्र के सभी 10 जनपदों के 33,274 शिक्षकों के नाम शामिल थे। इनमें झांसी जनपद के 3,764 शिक्षकों के नाम शामिल थे। इस सूची के जारी होने से पहले जनपद के लगभग आठ सौ मतदाताओं के नाम निरस्त किए गए थे। इनमें से ज्यादातर वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के वह शिक्षक थे जो प्राथमिक और जूनियर विंग में पढ़ाते हैं। इसे लेकर आपत्तियां आईं थीं। बताया गया था कि कुछ पात्र शिक्षकों के नाम हटा दिए गए है, जबकि कई अपात्र अब भी सूची में जगह बनाए हुए हैं। इस पर बुधवार से लगातार सूची में शामिल हर एक मतदाता का सत्यापन किया जा रहा है। शनिवार को चौथे दिन भी यह जांच जारी रही। अफसर पहले कलक्ट्रेट में बैठकर जांच करते रहे और इसके बाद सभी सदर तहसील में सिर जोड़े बैठे रहे। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई भी कुछ कहने के तैयार नहीं है।