झांसी। तीन साल पहले जिला अस्पताल को जिस फायर फाइटिंग व्यवस्था के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल गया था, अब उसी व्यवस्था में एसआईसी कक्ष में स्प्रिंकलर नहीं होने पर आपत्ति लगा दी गई है। तब बिना स्प्रिंकलर के एनओसी जारी हुई थी, लेकिन अब इसी कमी को दूर किए बिना एनओसी के नवीनीकरण से दमकल विभाग ने इन्कार कर दिया है।
अस्पताल प्रशासन ने करीब तीन माह पहले एनओसी के नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। अब ऑडिट आपत्ति के चलते मामला अटक गया है। ऐसे में जिला अस्पताल फिलहाल बिना वैध फायर एनओसी के संचालित हो रहा है।
1.94 करोड़ से तैयार हुआ था फायर फाइटिंग सिस्टम
करीब तीन साल पहले उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ (यूपीआरएनएस) ने जिला अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम और पंप हाउस की व्यवस्था कराई थी। इस पर करीब 1.94 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। काम पूरा होने के बाद अग्निशमन विभाग ने अस्पताल को तीन वर्ष के लिए फायर एनओसी जारी की थी। इस अवधि में अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम के साथ अन्य अग्निशमन व्यवस्थाएं भी संचालित होती रहीं। 27 सितंबर को तीन वर्ष की एनओसी की अवधि पूरी हो गई।
अब एसआईसी कक्ष में स्प्रिंकलर पर आपत्ति
एनओसी के नवीनीकरण की प्रक्रिया के दौरान दमकल विभाग की ओर से ऑडिट आपत्ति लगाई गई। इसमें मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष में स्मोक डिटेक्टर तो लगा होने, लेकिन स्प्रिंकलर नहीं होने की बात कही गई है। विभाग का कहना है कि इस कमी के रहते एनओसी का नवीनीकरण नहीं किया जा सकता।
मामला मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड के संज्ञान में पहुंचा। उन्होंने तीन साल पहले फायर फाइटिंग सिस्टम का काम करने वाली कार्यदायी संस्था यूपीआरएनएस के सहायक अभियंता (एई) को बुलाकर एसआईसी कक्ष में स्प्रिंकलर लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद आदेश को करीब दो माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक स्प्रिंकलर नहीं लगाया गया।
पहले एनओसी कैसे मिली, अब उसी कमी पर रोक क्यों?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एसआईसी कक्ष में स्प्रिंकलर फायर एनओसी के लिए अनिवार्य है तो तीन वर्ष पहले निरीक्षण के समय यह कमी क्यों नहीं बताई गई। उस समय इसी स्थिति में एनओसी जारी कर दी गई थी। अब नवीनीकरण के समय उसी कमी को आधार बनाकर एनओसी रोक दी गई है।
यूपीआरएनएस के एई मो. तनवीर के मुताबिक, उन्होंने करीब तीन साल पहले जिला अस्पताल में काम किया था। उस समय एसआईसी कक्ष में स्प्रिंकलर नहीं लगा था और इसके बावजूद एनओसी मिल गई थी। अब विभाग की ओर से स्प्रिंकलर लगाने के लिए कहा जा रहा है तो उसे लगवा दिया जाएगा।
एनओसी खत्म, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
27 सितंबर को एनओसी की अवधि समाप्त होने के बाद भी इसका नवीनीकरण नहीं हो सका है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज, तीमारदार और कर्मचारी आते हैं। इनमें गंभीर और ऐसे मरीज भी होते हैं जो आपात स्थिति में खुद सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सकते।
ऐसे में अस्पताल में अग्निशमन व्यवस्था का पूरी तरह मानकों के अनुरूप होना महत्वपूर्ण है। सवाल यह भी है कि नवीनीकरण लंबित रहने के दौरान अस्पताल में आग से सुरक्षा के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है और एनओसी जल्द जारी कराने के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई है।
मेरे संज्ञान में जिला अस्पताल की एनओसी का कोई मामला नहीं है। न ही मेरे पास कोई फाइल आई है। जब तक मामला पता नहीं होगा, तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं है। - राजकिशोर, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
सवाल: जब तीन साल पहले इसी स्थिति में एनओसी जारी हो सकती थी, तो अब उसी कमी को नवीनीकरण में बाधा क्यों माना गया?
फायर एनओसी क्यों जरूरी?
- अस्पताल में आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर आग पर नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण होता है।
- स्प्रिंकलर आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर आग को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- फायर एनओसी का उद्देश्य भवन में अग्निसुरक्षा से जुड़ी निर्धारित व्यवस्थाओं की जांच और अनुपालन सुनिश्चित करना है।