झांसी। महानगर की ऐतिहासिक पानी वाली धर्मशाला की सूरत बदलने के लिए चल रहे काम की धीमी रफ्तार पांच करोड़ के प्रोजेक्ट पर पानी फेर सकती है। क्योंकि धर्मशाला के जीर्णोद्धार कार्य में बारिश सबसे बड़ा रोड़ा बनेगी। अब तक महज 25 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। ऐसे में बारिश से पहले काम पूरा करना स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।
महानगर में 17वीं शताब्दी में मराठा शासन काल में महरानी लक्ष्मीबाई के पूर्वजों ने पानी वाली धर्मशाला का निर्माण कराया था। 18वीं शताब्दी में रानी ने इस जल स्रोत को विकसित किया। इसके बाद यहां पर तैराकों का जमावड़ा रहने लगा। लेकिन लगातार अनदेखी के चलते पानी वाली धर्मशाला बदहाल होती गई। धर्मशाला का कुंड पूरी तरह से जलकुंभी से पट गया। साथ ही नीचे नालों का गंदा पानी जमा हो गया। अब इसके जीर्णोद्धार के लिए स्मार्ट सिटी के तहत पांच करोड़ रुपये की लागत से काम शुरू किया गया है। दो महीने में अब तक 25 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। मौजूदा समय में कुंड में जमा गंदगी को निकालने का काम चल रहा है। बताया जाता है कि पानी वाली धर्मशाला में शहर के सबसे बड़े नटवली नाले का गंदा पानी गिरता है। जीर्णोद्धार कार्य के दौरान नाले को बंद किया जाना है, लेकिन काम की रफ्तार बेहद धीमी है। अगर यही हाल रहा, तो बारिश पूरे काम पर पानी फेर देगी। हालांकि स्मार्ट सिटी के अफसर 30 अप्रैल तक धर्मशाला का स्वरूप बदलने की बात कह रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखकर समय पर काम पूरा होना संभव नजर नहीं आ रहा है।
पहले भी बारिश करती रही है बदहाल
जिला प्रशासन ने पहले भी पानी वाली धर्मशाला की सूरत बदलने के लिए काम कराया था। कुछ साल पहले 20 लाख रुपये खर्च कर पूरी जलकुंभी को साफ किया गया। लेकिन ये काम अप्रैल के आखिरी वक्त में शुरू किया गया। जलकुंभी साफ करने में जुलाई आ गई और बारिश होने के बाद फिर से धर्मशाला में नाले का गंदा पानी पहुंच गया। इस बार भी अगर ऐसे हालात बने तो स्थिति बेहद खराब हो जाएगी।
कुंड से सिल्ट साफ करने का काम अंतिम चरण में हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट को 30 अप्रैल तक पूरा करना है। पूरी कोशिश की जा रही है कि बारिश से पहले प्रोजेक्ट खत्म कर लिया जाए। अमित शर्मा, अधिशासी अभियंता और नोडल अधिकारी स्मार्ट सिटी