झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण काल में पिछले आठ माह के दरम्यान बीयर की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल की तुलना में इस साल जिले में नौ लाख बीयर की बोतलें कम बिकी हैं। माना जा रहा है कि ठंडी होने की वजह से लोग बीयर से दूरी बनाए रहे।
बीयर का मजा ठंडी होने पर ही आता है। लेकिन, कोरोना वायरस के संक्रमण काल के दरम्यान लोग ठंडी चीजों से परहेज करते रहे। यहां तक कि कई लोगों ने गर्मी में भी गरम पानी और काढ़ा पीया। लोगों की इस प्रवृत्ति का असर बीयर की बिक्री पर भी आया है। चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल से लेकर जनवरी तक 10 महीनों में जिले में बीयर की 25,32,358 केन / बोतलें बिकीं। जबकि, पिछले साल इसी अवधि में 34,38,100 बीयर की केन / बोतलें बिकीं थीं। यानी कि गत वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में बीयर की बिक्री में 9,05,742 बोतलों की कमी आई है।
आमदनी घटने पर अंग्रेजी वाले पीने लगे देसी
झांसी। कोरोना काल में आमदनी घटने पर अंग्रेजी शराब पीने वाले तमाम शौकीन देसी पीने लगे। इसी का नतीजा रहा कि पिछले 10 महीनों के दरम्यान जिले में देसी शराब बिक्री में तीन लाख लीटर से अधिक का इजाफा हुआ है। जबकि, अंग्रेजी शराब की बिक्री में कटौती दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के अप्रैल माह से लेकर जनवरी तक 10 महीनों में 54,49,208 लीटर देसी शराब बिकी। जबकि, पिछले वित्तीय वर्ष में इसी अवधि में 51,10,932 लीटर देसी शराब की बिक्री हुई थी। यानी पिछले साल की तुलना में इस साल तीन लाख लीटर से अधिक देसी शराब बिकी। वहीं, अंग्रेजी शराब की बिक्री में दो हजार बोतलों की कमी आई है। पिछले साल 17,81,668 बोतलें बिकी थीं, जबकि इस साल 17,79,381 बोतलों की बिक्री हुई।
सरकार की आमदनी का बड़ा जरिया
झांसी। शराब और बीयर सरकार की आमदनी का बड़ा जरिया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि प्रति लीटर देसी शराब की बिक्री पर सरकार के खाते में 260 रुपये जाते हैं। जबकि, अंग्रेजी शराब की एक बोतल से सरकार को औसतन 400 रुपये का राजस्व मिलता है। बीयर की एक बोतल सरकार को औसतन 90 रुपये का राजस्व देती है।
ठंडी होने की वजह से लोगों ने कोरोना काल में बीयर से परहेज किया। इसके अलावा बीयर की बिक्री के सीजन में 26 मार्च से तीन मई तक दुकानें भी बंद रहीं। पिछले दस महीनों के दरम्यान जिले में देसी शराब की बिक्री ने उछाल मारा है, जबकि अंग्रेजी की मांग में कमी आई है। - प्रमोद कुमार, जिला आबकारी अधिकारी।