झांसी। कोरोना काल में जरा सी समस्या होने पर लोगों ने खूब जांचें कराईं। चूंकि, स्टैंडर्ड लैब की तुलना में सामान्य प्रयोगशालाओं की दरों में दोगुने तक का अंतर है। ऐसे में पैथोलॉजी लैब, सैंपल कलेक्शन केंद्र और डायग्नोस्टिक सेंटरों ने जमकर चांदी काटी। जबकि, महामारी के डर से घबराई जनता पैसा लुटाती रही।
जिले में कोरोना वायरस कहर बनकर टूटा। एक समय ऐसा आया जब झांसी में कोरोना से मृत्यु दर दहाई का आंकड़ा पार कर गई। जिले भर में दहशत का माहौल हो गया। जरा सी छींक आने पर लोग डॉक्टर को दिखाने पहुंचने लगे। वहीं, खुद भी डॉक्टर से जांचें लिखने का दबाव बनाने लगे। कोरोना दौर को पैथोलॉजी लैब, सैंपल कलेक्शन करने वाले केंद्र और डायग्नोस्टिक सेंटरों ने भी खूब भुनाया। कइयों सेंटरों ने तुरंत ही 10 से 20 फीसदी तक जांच की दरें बढ़ा दीं। स्टैंडर्ड लैब की तुलना में झांसी की सामान्य पैथोलॉजी लैबों में होने वाली कई जांचों की दर डेढ़ से दोगुनी तक महंगी है। ऐसे में मरीजों का पैसा लुटता रहा और जांच केंद्र की कमाई होती है।
जांचों में इतना अंतर
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जांच स्टैंडर्ड लैब सामान्य लैब
ईएसआर 70 100
यूरिन टेस्ट 70 100
जीबीजी 150 500
सीबीसी 200 300
थाइरॉयड 250 500
लिपिड प्रोफाइल 350 600
एचबीए 13 400 550
विटामिन डी 1100 1500