झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए 25 मार्च को घोषित किया गया लॉकडाउन 31 मई को समाप्त हुआ है। जबकि, अप्रैल और मई माह में शादियों के कई शुभ मुहूर्त थे। जिले में लगभग पांच हजार शादियां होनी थीं, जो लोगों को रद्द करनी पड़ गईं। हालांकि, प्रशासन की ओर से 30 लोगों की मौजूदगी में शादी समारोह आयोजित करने की छूट दी जा रही है। लेकिन, ज्यादातर लोगों को ये रास नहीं आ रही है। ऐसे तमाम लोग हैं, जो शादी समारोहों को स्टेटस सिंबल मानते हैं और वे अपना रसूख दिखाने के लिए धूमधाम से ही आयोजन करने के मूड में हैं, फिर चाहे इसके लिए महीनों इंतजार क्यों न करना पड़ जाए। इसके अलावा कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे की वजह से भी लोग किसी तरह की रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। इन परिस्थितियों में अब देवोत्थान एकादशी के बाद ही शहनाइयों की गूंज सुनाई देने की उम्मीद जताई जा रही है। शादियां रद्द होने की वजह से इससे जुड़ा कारोबार भी बुरी तरह से प्रभावित हो गया है।
अप्रैल और मई माह में दस ऐसे शुभ मुहूर्त थे, जिनमें जिले के सभी लगभग चार सौ छोटे - बड़े विवाह घर बुक थे। इसके अलावा अक्षय तृतीया व अन्य तिथियों में शादियां होनी थीं। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से जिले में पांच हजार से अधिक शादियां रद्द हो गईं हैं। अब तो देवोत्थान एकादशी के बाद शादी समारोह शुरू होने की उम्मीद है।
- वरुण कोहली, विवाह घर संचालक
अप्रैल और मई की शादियों के लिए महीनों पहले बैंड बुक हो गए थे। लेकिन, अचानक शादियां रद करनी पड़ीं। पुरानी बुकिंग कैंसल हो गईं, लोग एडवांस में दिया पैसा तक वापस मांग रहे हैं। जबकि, नई बुकिंग हो नहीं रही हैं। प्रत्येक बैंड से न्यूनतम सौ लोगों की रोजी रोटी चलती हैं। सभी परेशान हैं। देवोत्थान एकादशी के बाद ही बैंड बजने की उम्मीद है।
- चिंटू मंसूरी, बैंड संचालक
शादी के लिए महज तीस लोगों की इजाजत ही मिली है। बावजूद, तमाम लोग अभी शादी समारोह आयोजित करने के मूड में नहीं है। उन्होंने शादियों की तिथि आगे बढ़ा दी है। जो कर भी रहे हैं, वे बेहद कम लोगों की मौजूदगी में घर से ही रस्म निभा रहे हैं। ऐसे में इवेंट ऑर्गनाइजरों के लिए फिलहाल काम नहीं बचा है। अब तो सर्दियों में ही गाड़ी पटरी पर आने की उम्मीद है।
- शैली जयदीप सिंह, इवेंट एंड वेडिंग प्लानर
शादी समारोहों में खाने के इंतजाम के लिए लोग महीनों पहले ही कैटर्स बुक कर लेते हैं। मई, अप्रैल और जून की पचास से अधिक बुकिंग रद्द हो गईं हैं। लोगों ने एडवांस में जो पैसा दिया था, वो हमने खानपान की सामग्री उपलब्ध कराने वाले व अन्य स्टाफ को एडवांस में दे दिया। अब लोग बुकिंग का पैसा वापस मांग रहे हैं। जबकि, धंधा बचा नहीं है।
- पप्पू राय, कैटर्स