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धनतेरस पर बाजार में हुई धन वर्षा, एक ही दिन में चालीस करोड़ का कारोबार

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धनतेरस पर मानिक चौक के वर्तन बाजार में खूब हुई खरीदारी। अमर उजाला
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धनतेरस पर महानगर के बाजारों में खूब धन वर्षा हुई। एक ही दिन में लोगों ने खरीदारी पर चालीस करोड़ रुपये खर्च कर डाले। इससे कारोबार खिल उठा। सबसे ज्यादा बूम की स्थिति ऑटोमोबाइल्स सेक्टर में रही। इसके अलावा सोने - चांदी की खरीद पर भी लोगों ने जमकर पैसा खर्च किया। खासतौर पर सोने के कम वजन के आभूषणों के साथ ठोस सोने - चांदी की भी खूब मांग रही। बर्तन बाजार भी ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहा। ग्राहकों की आमद बनी रहने की वजह से बाजार देर रात तक खुले रहे।
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कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे ज्यादा असर कारोबार पर पड़ा था। तीन महीने तक लॉकडाउन लागू रहने की वजह से बाजार खुल तक नहीं पाए थे। जबकि, अनलॉक प्रक्रिया में भी ग्राहक महामारी के डर से बाजारों से दूरी बनाए रहे थे। लेकिन, दिवाली के नजदीक आने के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी थी। बृहस्पतिवार को धनतेरस के अवसर पर महीनों बाद बाजार में जमकर धन वर्षा हुई। हालांकि, दिन की शुरुआत धीमी रही। दोपहर तक दुकानों में इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आए, लेकिन दोपहर बाद ग्राहकों की आमद बढ़ने लगी। शाम तक सराफा बाजार, मानिक चौक, बड़ाबाजार, सीपरी बाजार, सदर बाजार ग्राहकों की भीड़ से गुलजार हो उठे। देर रात तक दुकानों में रौनक बनी रही। वाहन व इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के शोरूम में दिन भर ग्राहकों का आवागमन बना रहा।

कारोबारी जानकारों के अनुसार लोगों ने वाहनों की खरीद पर बीस करोड़ रुपये की रकम खर्च की। इसमें सोलह करोड़ रुपये चौपहिया पर खर्च किए गए। सबसे ज्यादा बिक्री छोटी कारों की हुई। चार करोड़ रुपये दुपहिया वाहनों के बाजार पर खर्च किए। सराफा बाजार भी गुलजार रहे। सोने के हल्के आभूषणों की खूब मांग रही। इसके अलावा ठोस सोने - चांदी की भी खूब बिक्री हुई। टीवी, फ्रीज, म्यूजिक सिस्टम जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम भी लोग खूब अपने घर ले गए। मोबाइलों की बिक्री भी जोर पकड़ रही। दस से पंद्रह हजार की रेंज के मोबाइल खूब खरीदे गए। इसके अलावा ऑनलाइन उत्पाद भी खूब लोगों के घर पहुंचे।
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बाजारों में पुलिस रही चौकस
झांसी। धनतेरस के अवसर पर बाजारों में पुलिस की व्यवस्था चौकस रही। महिला पुलिस भी खासी संख्या में तैनात रही। बड़े वाहनों को बाजार में प्रवेश नहीं करने दिया गया। आड़ी - तिरछी पार्किंग भी नहीं होने दी गई। सामान्य दिनों की अपेक्षा अतिक्रमण पर भी काबू रहा, जिससे बाजारों में चहलकदमी आसान रही।

सजे- धजे नजर आए बाजार
झांसी। कोरोना संक्रमणकाल के शुरू होते ही बाजार सन्नाटे के आगोश में समा गए थे। बाजारों की महीनों की ये मायूसी धनतेरस पर टूट गई। सभी बाजार दुल्हन की तरह सजे नजर आए। कारोबारियों ने भी ग्राहकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दुकानें सजधज के साथ ग्राहकों का स्वागत करती नजर आईं।
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