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पहले बताइए स्ट्रीट लाइट कंपनी की है या निगम की, इसके बाद ही सुधारी जाएगी

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झांसी। अगर आपके क्षेत्र की एलईडी लाइट खराब पड़ी है, तो शिकायत करने से पहले यह पता कर लीजिए कि लाइट कंपनी की लगी है या निगम की लगी हुई है। क्योंकि शिकायत करने के बाद यही सवाल पूछा जाएगा। नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग से लाइटों को सही कराने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि महानगर में तमाम जगहों पर एलईडी स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हुई हैं। इसमें नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग और केंद्र सरकार से नामित कंपनी के बीच तय नियम बाधा बन रहे हैं। इसके चलते लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतों के बाद भी लाइटें सही नहीं होने पर लोगों और पार्षदों में आक्रोश है।
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महानगर क्षेत्र में करीब 30 हजार एलईडी लाइटें लगी हुई हैं। करीब दो साल पहले ईईएसएल कंपनी ने महानगर में 24 हजार सोडियम लाइटों को बदलकर एलईडी लाइटें लगाई थीं। इन लाइटों के खराब होने पर बदलने और सही करने का जिम्मा भी कंपनी को दिया गया था। इसके अलावा खाली पड़े करीब 12 हजार पोल पर नगर निगम की ओर से एलईडी लाइट लगाई गईं। कंपनी से अनुबंध के दौरान तय किया गया था लाइट खराब होने पर तीन दिन में उसे सही कराया जाएगा। ऐसा न होने पर जुर्माना लगेगा। अब आलम यह है कि महानगर में कंपनी की तमाम लाइटें खराब पड़ी हैं। शिकायतों के बाद भी इनको सही नहीं किया जाता। महानगर के कई इलाकों में कंपनी की लाइट भी है और निगम की लाइटें भी लगी हैं। लाइट खराब होने पर लोग शिकायत करते हैं, तो कंपनी के कर्मचारी निगम की लाइट सही नहीं करते और निगम के कर्मचारी कंपनी की लाइट सही नहीं करते। ऐसे में लोगों को दिक्कत होती है। कई बार तो लोगों को यह पता नहीं होता कि लाइट निगम की है या कंपनी की लगाई हुई है। ऐसे में पार्षद कई बार नगर निगम अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। महानगर के तमाम क्षेत्रों में त्योहार पर भी अंधेरा पसरा हुआ है।
कहते हैं पार्षद
महानगर में एलईडी लाइटों के नाम पर बड़ा घालमेल है। कंपनी के कर्मचारी चार लाइटें सही करने आते हैं और चार खराब पड़ी रहती हैं। निगम के कर्मी कंपनी की लाइट सही नहीं करते और कंपनी के लोग निगम की लाइटों को सही नहीं करते। इससे दिक्कत होती है। - प्रदीप नगरिया, पार्षद
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एलईडी लाइटों को सही कराने में मनमानी होती है। कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन लाइटें सही नहीं होती हैं। वार्ड के लोग पार्षदों से शिकायत करते हैं। इसे लेकर कई बार फजीहत हो जाती है। नगर निगम में कोई सुनने वाला नहीं है।- मुकेश सोनी बंटी, पार्षद
अनुबंध के मुताबिक कंपनी ने कमांड सेंटर बनाने की बात कही थी। लेकिन कंपनी का निगम में कोई ऑफिस ही नहीं है। कई बार तो शिकायत सुनी नहीं जाती। शिकायत निस्तारण न होने पर पेनल्टी लगाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वह भी बंद है।- पुष्पेंद्र कुमार पार्षद
दीपावली के त्योहार पर महानगर में कई जगहों पर अंधेरा पसरा हुआ है। कई बार निगम अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अगर टीम आती भी है, तो टाल मटोल कर चली जाती है। - गीता देवी, पार्षद
इनका कहना है
शिकायत मिलने पर तुरंत टीम भेजी जाती है। अगर कहीं कोई दिक्कत आ रही है, तो उसे दिखवाया जाएगा। महानगर की लाइटोें को सही कराने के लिए टीमें लगी हुई हैं। - शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त
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