कोराना काल में ड्रग्स माफियाओं ने उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के जिलों में बड़ी मात्रा में नशे का सामान सप्लाई किया है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद दोनों राज्यों में पुलिस बल नेटवर्क की तलाश में जुट गया है। यूपी और एमपी की एसटीएफ साझा अभियान चलाकर धरपकड़ में जुटी है। झांसी में अभी तक 12 क्विंटल, ललितपुर में 2 क्विंटल और जालौन में 1 करोड़ का गांजा बरामद हो चुका है। जबकि सागर और नरसिंहपुर में में 8 करोड़ की हशीश पकड़ी जा चुकी है।
जिस वक्त कोराना संक्रमण के चलते सब कुछ बंद था उस वक्त ड्रग्स माफिया नशे के सामान का स्टॉक करने में जुटे थे। ट्रेनों का संचालन बंद होने के चलते ट्रकों से नशीले पदार्थ की सप्लाई की गई। बुंदेलखंड में गांजा की 8 बड़ी खेप पहुंचीं थी जिन्हें झांसी, ललितपुर, जालौन, टीकमगढ़, सागर और दतिया तक पहुंचाया गया। खास बात यह है कि नशे के सामान की सप्लाई ट्रकों के माध्यम से की गई। एसटीएफ ने भी मार्च से अक्तूबर तक झांसी में 21 लोगों को गिरफ्तार करके 12 क्विंटल गांजा बरामद किया।
ललितपुर में भी 2 क्विंटल गांजा मिला और 15 लोग पकड़े गए। जबकि जालौन में एक करोड़ का गांजा मिला। यह सभी बरामदगी ट्रकों से की गई। इन लोगों की गिरफ्तारी से एजेंसियों को जो इनपुट मिला उसके मुताबिक लॉकडाउन की अवधि में मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, हाथरस, आगरा, गाजियाबाद, बिजनौर, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर में ड्रग्स पहुंची है। 11 माफिया के नाम भी सामने आए हैं जिनकी तलाश में एसटीएफ लगी है। इनमें कई की लोकेशन मध्यप्रदेश के ग्वालियर, टीकमगढ़, और सागर में मिल रही है। दोनों राज्यों की स्पेशल फोर्स इन माफिया की धरपकड़ को दबिश दे रही हैं।
एसटीएफ मध्यप्रदेश के जिलों में मार रही छापे
एसटीएफ मध्यप्रदेश के जिले ग्वालियर, सागर, गुना, टीकमगढ़, नरसिंहपुर और ब्यावरा जिले में नेटवर्क की तलाश कर रही है। कुछ ऐसे माफिया के नाम भी सामने आ रहे हैं जो जेल में बंद हैं और नशे का कारोबार करा रहे हैं। एसटीएफ के गणेश ठाकुर का कहना है कि बड़े पैमाने पर हशीश पकड़ी गई थी और 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। हशीश को चेन्नई ले जाया जा रहा था। इनसे पूछताछ में जो नाम सामने आए थे उनकी गिरफ्तारी को दबिश दी जा रही है।
पुलिस से बचने को ट्रकों में बैठा लिया था प्रवासी मजदूरों को
लॉकडाउन की अवधि में जब हर तरफ अफरातफरी थी और दूसरे राज्यों में रह रहे मजदूर अपने घरों को जाने के लिए बेचैन थे उस समय ड्रग्स माफियाओं ने नशे का सामान ट्रकों में छिपाकर भिजवाया। खास बात यह है कि पुलिस की निगाह से बचने के लिए ट्रकों में मजदूरों को भी बैठा लिया गया था ताकि पुलिस चेकिंग से बच सकें और ट्रकों को भी आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सके। एसटीएफ को इसके पुख्ता सुराग मिले हैं। एसटीएफ ने मई में ही दो ट्रकों को तो टोल प्लाजा से पकड़ा था। इन ट्रकों से गांजा बरामद हुआ था।