झांसी। गर्मी की दस्तक के साथ पेयजल की किल्लत शुरू हो गई है। पिछले तीन दशक में महानगर के विस्तार के साथ पेयजल पहुंचाने के संसाधन व व्यवस्थाएं नहीं बढ़ाए जाने के कारण अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। कई क्षेत्रों में तो पाइप लाइन के अंतिम छोर तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है।
जल निगम द्वारा बबीना जल शोधन संयंत्र से दिया जाने वाला सत्तर एमएलडी पानी नगर में सबसे पहले नगरा एवं पुलिया नंबर नौ जोन में पहुंचता है, इसके बाद तालपुरा जोन, सागर गेट जोन और पुराना मोटर स्टैंड जोन और फिर खातीबाबा, सीपरी, मसीहागंज, सिविल लाइन, आयुर्वेदिक कॉलेज व खंडेराव गेट जोन तक पहुंचता है।
इसके अलावा जल संस्थान द्वारा पहूज बांध से दस एमएलडी कच्चा पानी प्राप्त कर बाहर दतिया गेट स्थित जलकल संस्थान में शुद्धीकरण के बाद नरसिंह राव टौरिया व दरीगरान जोन को उपलब्ध कराया जाता है। पिछले तीन दशकों से इसी व्यवस्था के तहत शहर में पानी की सप्लाई की जा रही है। जबकि, इस दौरान नगर क्षेत्र का पच्चीस प्रतिशत से अधिक विस्तारीकरण हो चुका है। पुराने क्षेत्र में भी जनसंख्या का बोझ बढ़ा है। हालात यह हैं कि पाइप लाइन से जुड़े क्षेत्र के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
हर साल की तरह नगर के कई क्षेत्रों के लोगों के सामने जल संकट की समस्या फिर खड़ी हो गई है। इनमें सबसे प्रभावित तालपुरा जोन से जुड़ा तालपुरा, हैवट मार्केट, कसाई मंडी, शिवाजी नगर, बड़ागांव गेट बाहर नारायण बाग चौराहे तक का क्षेत्र है। मास्टर कॉलोनी, वर्मा कॉलोनी, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, अन्न पूर्णा कॉलोनी व शिवाजी नगर के अंतिम छोर तक पानी पहुंच भी नहीं पाता है।
जल निगम द्वारा बड़ागांव गेट बाहर नया जोन प्रस्तावित है, लेकिन बजट के इंतजार में कार्य लटका है। इसी तरह सिलवटगंज जोन में सीडब्लूआर व ओवरहेड टैंक की योजना के परवान न चढ़ पाने के कारण सिलवटगंज, गढ़ियागांव व प्रेमनगर में अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। कई इलाकों में पाइपलाइन ही नहीं बिछी है।
वहीं, लहरगिर्द जोन में सीडब्लूआर व ओवर हेड टैंक की योजना प्रस्तावित है, लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका है। अभी इस जोन के लहरगिर्द, आईटीआई, सिद्धेश्वर नगर को मसीहागंज जोन से आपूर्ति दी जाती है, लेकिन गर्मी में यहां तक पानी पहुंचना बंद हो जाता है।
इधर, मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में स्थित गुमनावारा, वीरांगना नगर, महाराणा प्रताप नगर, करगुवा, वकील कॉलोनी आदि क्षेत्र के लोग पाइप लाइन न होने के कारण हैंडपंप व बोरिंग पर निर्भर हैं। जलस्तर गिरने से इन क्षेत्रों में लगातार संकट गहराता जा रहा है। मजबूरन, गर्मी में उक्त क्षेत्र के लोगों को हैंडपंप व जल संस्थान द्वारा संचालित टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
नब्बे दिन होगा पानी के टैंकरों का संचालन
झांसी। महानगर में अनेक क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पाइप लाइन नहीं है। उन इलाकों के लोगों को पानी के लिए हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। इनमें कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां गर्मियों में जल स्तर नीचे चले जाने से हैंडपंप सूख जाते हैं। इनमें करगुवांजी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रतापनगर, मयूर विहार कॉलोनी सराय, सिलवटगंज, डड़ियापुरा, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, गढ़िया गांव, वीरांगना नगर, पाल कॉलोनी, सिद्धेश्वर नगर, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट, मुकरयाना, मैला की टौरिया, मसीहागंज, लहरगिर्द, करारी, राजपूत नगर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पाइपलाइन नहीं होने के कारण टैंकरों से जलापूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। इस बार नब्बे दिन तक टैंकर चलाने की योजना तैयार की गई है।
‘टैंकर संचालन के लिए तीन ठेकेदारों ने आवेदन किया है। जल्द ही न्यूनतम रेट वाले ठेेकेदार को ठेका दिया जाएगा। वैसे एक मई से टैंकर संचालन की योजना तैयार की गई है। अगर पहले जरूरत पड़ती है तो टैंकरों का संचालन जल्दी शुरू कर दिया जाएगा।’
- आरएस यादव, अधिशासी अभियंता जल संस्थान