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अपहरण से लेकर बरामदगी तक उठ रहे कई सवाल

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बदमाशो के चुंगल से छूट कर आए डॉ. गुरुबक्शानी को मिठाई खिलातीं उनकी बहन पुष्पा, उनके पास बैठी हैं पत
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झांसी। चिकित्सक डा. आरके गुरुबक्शानी के अपहरण से लेकर बरामदगी तक खूब सवाल उठ रहे हैं। अचानक डकैतों के चंगुल से छूटकर आना कई सवाल खड़े कर रहा है। शनिवार की देर रात पुलिस टीम चिकित्सक को झांसी लेकर पहुंची। घर पहुंचने पर परिजन व रिश्तेदारों ने उनको गले लगा लिया। सभी ने एक- दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की।
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शनिवार सुबह चिकित्सक डा. गुरुबक्शानी के मुरैना में सकुशल मिलने की खबर मिलते ही परिजनों के साथ पुलिस ने राहत की सांस ली थी। लेकिन, मुरैना में डकैतों के चंगुल से छूटकर सड़क तक पहुंचना किसी के गले नहीं उतर रहा। अपहरण से लेकर बरामदगी तक कई सवाल उठते रहे, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं मिला। सभी इसे बड़ी वारदात बताते रहे। पुलिस के अनुसार डा. गुरुबक्शानी का अपहरण करके डकैत मुरैना के एक खेत में ले गए थे।
पुलिस के अनुसार हाथ-पैरों में जंजीर बांधकर सरसों के खेत में डाल दिया गया था। सर्दी में रात काटना उनके लिए मुश्किल था। किसी तरह रात कटने पर सुबह करीब पांच बजे उनकी आंख खुली। पास में ही एक डकैत सो रहा था। चिकित्सक ने हिम्मत दिखाई और घिसटते हुए खेत से सड़क पर पहुंचे। डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत में उनके हाथ और पैर छिल गए। खून भी निकलने लगा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
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सड़क पर पहुुंचते ही पुलिस को देखकर जान में जान आई। मुरैना के एक अस्पताल में उनका उपचार कराया गया। दिन भर झांसी पुलिस भी मामले की जानकारी लेती रही। शाम करीब साढ़े चार बजे पुलिस टीम मुरैना से झांसी के लिए रवाना हुई। 7.45 बजे पुलिस उनको घर लेकर पहुंची। परिजनों ने मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। परिजनों ने इसका पूरा श्रेय पुलिस को दिया है।
‘तुम्हारी फीस लगती है, हम भी फीस लेते हैं’
अपहरण करने के बाद डकैतों ने उनको पैरों के नीचे लिटा दिया था। आंख पर पट्टी बांधने के साथ ही मुंह पर कपड़ा बांध दिया था। रास्ते में पल-पल उनको घबराहट होती रही। उन्होंने डकैत से पूछा कि उनको कहां और क्यों ले जा रहे हैं। इस पर एक डकैत ने कहा कि तुम चिकित्सक हो, तुम्हारी फीस लगती है, हम भी अपनी फीस लेते हैं। चिंता नहीं करो, तुम्हें छोड़ देंगे।
छह से सात घंटे तक चली गाड़ी
जिस गाड़ी में डालकर उनको ले जाया गया था, वह छह से सात घंटे तक चली। डा. गुरुबक्शानी को खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उनको कहां ले जाया जा रहा है। करीब छह से सात घंटे के सफर के बाद जब उनको उतारा तो वह एक खेत में थे। कुछ देर के लिए पट्टी हटाने के बाद पुन: उनकी आंख पर पट्टी बांध दी गई।
कभी चित्रकूट तो कभी मानिकपुर आने की करते रहे बात
डकैतों ने डा. गुरुबक्शानी को गुमराह भी किया। बार-बार डकैतों के मोबाइल पर फोन घनघनाते रहे। बात करने के दौरान डकैत कभी चित्रकूट आने तो कभी मानिकपुर आने का जिक्र करते रहे। ऐसे में डा. गुरुबक्शानी को लगा कि शायद उनका अपहरण कर मानिकपुर के जंगलों में ले जाया जा रहा है। यह सुनकर बार-बार उनके दिल की धड़कनें भी बढ़ जातीं। सुबह डकैतों के चंगुल से छूटकर सड़क पर पहुंचने के बाद पता चला कि वह मानिकपुर नहीं, बल्कि मुरैना में हैं।
ऑपरेशन कर देना, फिर छोड़ देंगे
डकैतों ने रास्ते में डा. गुरुबक्शानी से यह भी कहा कि एक डकैत के भतीजे का ऑपरेशन करना है। उसके बाद सुरक्षित घर छोड़ दिया जाएगा। लेकिन, उनकी टेंशन बढ़ गई। बार-बार वह डकैतों से घर छोड़ने की जिद करते रहे, लेकिन उनकी बात को हर बार अनसुना कर दिया गया।
एसएसपी ने संभाल रखी थी कमान, पल-पल लेते रहे अपडेट
झांसी। चिकित्सक के लापता होनेे की खबर पर एसएसपी ने कमान संभाल ली थी। उन्होंने टीमें गठित कर जल्द बरामदगी के निर्देश दिए। पूरी रात अधिकारियों व पुलिस को निर्देश देकर अपडेट लेते रहे। रात में पुलिस ने शहर से लेकर हाईवे तक को खंगाल डाला। तड़के मुरैना से बरामद होने की खबर मिलने पर एसएसपी ने ग्वालियर व मुरैना के पुलिस अधिकारियों से बात की। एसएसपी ने एसपी सिटी विवेक कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में एसओजी टीम प्रभारी आशीष मिश्रा, सीपरी बाजार थाना प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र दुबे, योगेंद्र सिंह चौहान, दुर्गेश चौहान, मनोज, चंद्रशेखर, प्रदीप सेंगर की टीम मुरैना भेजी। मुरैना पहुंचकर पुलिस टीम ने गांव में दिन भर कांबिंग की। झांसी पुलिस को इस दौरान कई सुराग भी मिले हैं। कई महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने के लिए एसपी सिटी व एसओजी टीम मुरैना में रुक गई है।
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