झांसी। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कंपनियों की कहानी फाइलों में बंद होकर रह गई है। महानगर में काम कर रही कंपनियों के अनुबंध डेढ़ साल पहले खत्म होने के बाद अब तक काम कराया जा रहा है। वहीं कंपनियां मनमानी पर उतारू हैं। तमाम वार्डों में अभी कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। साथ ही शत प्रतिशत घरों से कूड़ा लेने की योजना को भी पलीता लग रहा है। अब स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 का भी काम शुरू होना है। ऐसे में कूड़ा उठान व्यवस्था सही करने में नगर निगम को कड़ी मशक्कत करनी होगी।
महानगर में पांच साल पहले कूड़ा कलेक्शन के लिए नगर निगम ने पांच कंपनियों से अनुबंध किया था। अनुबंध के मुताबिक कंपनियों को महानगर के 100 फीसदी घरों से कूड़ा लेना था और 40 फीसदी घरों से यूजर चार्ज लेकर नगर निगम को देना था। लेकिन कंपनियां इसे लेकर मनमानी करती रहीं। झांसी में काम कर रहीं कंपनियों को आगरा में भी काम का जिम्मा सौंपा गया था। आगरा में कूड़ा कंपनियों की मनमानी की पोल खुलने के बाद एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद झांसी में भी कंपनियों की कारगुजारी को लेकर सवाल खड़े हुए। पता चला कि चार कंपनियों के अनुबंध मार्च 2019 में ही खत्म हो गए हैं। तब तत्कालीन नगर आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने 10 दिन में नए सिरे से टेंडर कराने की बात कही। कहा गया था कि आरएफआईडी तकनीक से कूड़ा कलेक्शन कराया जाएगा। अधिकारियों ने पूरा प्रस्ताव तैयार भी कर लिया। इस बीच नगर आयुक्त का तबादला हो गया। नए नगर आयुक्त के सामने भी कूड़ा कलेक्शन कंपनियों की मनमानी का मामला उठा। उन्होंने प्रस्ताव में फेरबदल कर नए अनुबंध शुरू करने की तैयारी की, लेकिन अब तक नई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। ऐसे में कंपनियों ने फिर से मनमानी शुरू कर दी है। पार्षद उमेश जोशी बताते हैं कि कूड़ा कंपनियां हर घर से कूड़ा नहीं लेती हैं। सदन की बैठक में इस मामले को उठाया जाएगा। पार्षद प्रदीप नगरिया का कहना है कि अब स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू होने वाला है, लेकिन सफाई की दिक्कत दूर नहीं हो रही है। ऐसे झांसी अव्वल कैसे बन पाएगी?
स्मार्ट सिटी के तहत कूड़ा कलेक्शन के लिए 13 वार्डों को चिंह्ति किया गया है। इसका टेंडर निकाला जा चुका है। जबकि नगर निगम 47 वार्डों में कूड़ा कलेक्शन के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। जल्द ही टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। - अरुण कुमार गुप्त, अपर नगर आयुक्त