- बुंदेलखंड साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन 7 सत्रों में साहित्य, कला और सिनेमा पर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। एक्टिंग में करिअर बनाने के लिए अंदर से आवाज आनी जरूरी है। इसके बाद अगर परिवार-समाज से लड़ना भी पड़ जाए तो लड़ो। ये बात बुंदेलखंड साहित्य महोत्सव (बीएलएफ) में अभिनेत्री निधि बिष्ट ने एक्टिंग में करिअर बनाने वाली लड़कियों से कही। झांसी किले की तलहटी स्थित शहीद बिपिन रावत पार्क में तीन दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन सात सत्र हुए। इसमें साहित्य, कला, सिनेमा और पत्रकारिता जगत के दिग्गजों ने अपने विचार रखे।
पहले सत्र में काशी युगे-युगे विषय पर साहित्यकार त्रिलोक नाथ पांडेय से लेखक वैभवमणि त्रिपाठी ने चर्चा की। उन्होंने काशी का इतिहास बताते हुए कहा कि काशी की महिमा इतनी निराली है कि बुद्ध से लेकर मोदी तक काशी आए। अपनी पुस्तक काशी कथा पर उन्होंने चर्चा की। इसके बाद सिविल सेवा अधिकारी और लेखक विवेक कुमार जैन की जेंडर इक्वलिटी, मेंटल हेल्थ पर लिखित पुस्तक ''''बचपन के पते पर'''' के कवर का लोकार्पण हुआ।
दूसरे सत्र में कला का जीवंत संसार विषय पर आर्टिस्ट अभिषेक कुमार सिंह से आकांक्षा सिंह ने चर्चा की। उन्होंने शिल्पकला के क्षेत्र में आने वाले युवाओं का मार्गदर्शन किया। तीसरे सत्र में विदेश मंत्रालय में निदेशक और लेखक नितिन प्रमोद और पत्रकार नीरज मिश्र से गौरी फाउंडेशन के संस्थापक राहुल द्विवेदी ने चर्चा की।
अमिताभ बच्चन रहे मेरी पहली प्रेरणा : फैसल मलिक
पंचायत सीरीज के प्रह्लाद चा यानी फैसल मलिक से डीयू में एसो. प्रो. मुन्ना कुमार पांडेय ने संवाद किया। फैसल मलिक ने कहा कि शुरुआती किरदार काफी छोटे मिले। मौका लपककर उन्हें निभाया। रोल मॉडल के सवाल पर कहा कि कई लोगों से प्रेरित हुआ। अमिताभ बच्चन उनमें से एक थे। फिर इरफान से प्रेरित हुआ। आजकल रणवीर कपूर काफी प्रेरणा देते हैं। बाकी रोल मॉडल तो पिता ही हैं। फैसल ने पुलिस वाले के रूप में विभिन्न सीरीज में अपने किरदारों पर कहा कि इस रोल से खुशी मिलती है। इसलिए बार-बार करता हूं। वहीं, पंचायत सीरीज के अपने अनुभवों, अगले प्रोजेक्ट और पढ़ी जाने वाली किताबों पर भी चर्चा की।