झांसी। शहर के प्रमुख हड्डी रोग चिकित्सक डॉ. अभय गुप्ता के छह साल के बेटे का सोमवार की दोपहर स्कूल से लौटते समय उनके ही कार ड्राइवर ने अपहरण कर लिया। पुलिस ने सात घंटे के अंदर मध्यप्रदेश के बकुंआ के जंगल से अपहर्ताओं के चंगुल से बालक को मुक्त कराकर रात में करीब नौ बजे परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बच्चे के अपहरण की घटना से जहां पुलिस विभाग में हड़कंप रहा, वहीं चिकित्सक समुदाय व अन्य लोगों में सनसनी फैल गई। काफी संख्या में लोग डा. गुप्ता के निवास पर पहुंच गए।
नवाबाद थानांतर्गत वीरांगना नगर में डॉ. अभय गुप्ता का क्लीनिक है, वहीं उनकी पत्नी डॉ. रूबी गुप्ता की पैथोलॉजी लैब है। क्लीनिक से सटा उनका निवास है, जहां वह परिवार समेत रहते हैं। इन दिनों डॉ. गुप्ता जिले के बाहर गए हुए हैं। उनका छोटा बेटा प्रियांशु उर्फ अंशु (करीब 6 वर्ष) सदर बाजार स्थित एक स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ता है। सोमवार की सुबह डॉ. रूबी गुप्ता ने प्रियांशु को अपने कार ड्राइवर राघवेंद्र तिवारी हाल निवासी शिवाजी नगर मूल निवासी करगुवां थाना सेंधरी टीकमगढ़ के साथ कार संख्या यूपी93 एएफ- 6999 से स्कूल भेजा।
दोपहर में 12.30 बजे छुट्टी के समय चालक उसे कार से लेने गया। दोपहर एक बजे तक जब कार नहीं आई तो डॉ. रूबी ने चालक को फोन मिलाया। फोन चालक के बजाय किसी अन्य व्यक्ति ने उठाया। उसने डॉ. रूबी से कहा कि उनका पुत्र व चालक उनके कब्जे में है। इतनी बात कहकर उसने फोन काट दिया। जब दोबारा फोन मिलाया तो फोन स्विच आफ मिला। अनहोनी की आशंका से ग्रस्त डा. रूबी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने फोन से पति को मामले की जानकारी दी ैर फिर आईएमए सचिव डॉ. संजय त्रिपाठी के चिरंजीव नर्सिंगहोम पहुंची और उन्हें जानकारी दी। डॉ. त्रिपाठी ने तुरंत पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया। कुछ देर में डीआईजी अजय मोहन शर्मा, एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे, एसपी सिटी राजेश यादव, एसपी देहात दिनेश सिंह पुलिस फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे।
पुलिस अफसरों ने डॉ. रूबी से पूरे मामले की जानकारी करके कई टीमों को तलाश के लिए लगाया। कुछ देर बाद एसएसपी ने पूरे आपरेशन की कमान अपने हाथों में ले ली। इस बीच पुलिस ने चालक के शिवाजी नगर घर को तलाशा तो उसके परिवारीजन गायब मिले। मकान पर ताला पड़ा था। चालक की संलिप्तता की आशंका पर पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर की डिटेल निकलवाई और परिजनों के फोन नंबरों के बारे में जानकारी की। इसके बाद पुलिस ने परिजनों से संपर्क साधा तो उन्होंने भी पुलिस को गुमराह किया।
इस बीच पुलिस को पता चला कि बरुआसागर के जंगल में अपहृत बालक किसी दूसरे गैंग को सौंपने की तैयारी में है, जिसपर पुलिस ने पूरा जंगल छान मारा मगर सफलता नहीं मिली। इसी बीच पुलिस के हाथ कई और महत्वपूर्ण जानकारी लगीं। पुलिस ने शाम करीब सात बजे मध्यप्रदेश के बकुआं के जंगल को घेर कर अपहर्ताओं को दबोचकर अपहृत बालक को मुक्त करा लिया। पुलिस ने अपहरण में प्रयुक्त डॉक्टर की कार भी बरामद कर ली। रात करीब नौ बजे एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बालक उसकी मां डॉ. रूबी के घर जाकर सुपुर्द कर दिया।